उत्तर प्रदेशराज्य

‘मां मारती-पीटती थीं, साथ नहीं रहना चाहती’… 25 साल की बेटी की बात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि माता-पिता अपनी बालिग बेटी को उसकी इच्छा के खिलाफ अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अदालत ने 25 वर्षीय युवती को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति अपनी पसंद की जगह और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है।

मां ने बेटी को अदालत में पेश करने की मांग की थी

यह याचिका कलावती देवी ने दायर की थी। उन्होंने अपनी 25 वर्षीय बेटी कुमारी पूजा को अदालत के सामने पेश किए जाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत में हुई। अदालत ने 28 सितंबर को याचिका पर फैसला सुनाया।

इससे पहले 17 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य को पूजा को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। आदेश के पालन में पूजा को अदालत में पेश किया गया।

पूजा ने कहा- अपनी मर्जी से दिल्ली में रह रही हूं

अदालत में बातचीत के दौरान पूजा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह अपनी इच्छा से दिल्ली में स्वतंत्र रूप से रह रही है। उसने यह भी कहा कि वह किसी अवैध हिरासत में नहीं है और अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहती।

पूजा ने अदालत को बताया कि उसकी मां का उसके प्रति व्यवहार सौहार्दपूर्ण नहीं रहा है। उसका आरोप था कि घर पर रहने के दौरान उसकी मां अक्सर उसके साथ मारपीट करती थीं और गाली-गलौज भी करती थीं।

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मां ने आरोपों से किया इनकार

वहीं, कलावती देवी ने बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि पूजा को अपने माता-पिता के साथ रहना चाहिए। हालांकि, अदालत ने पूजा के बयान पर गंभीरता से विचार किया और उसके बालिग होने तथा अपनी इच्छा से मां के साथ नहीं रहने की बात को ध्यान में रखा।

बालिग बेटी की इच्छा को माना अहम

हाईकोर्ट ने कहा कि पूजा बालिग है और उसे अपनी पसंद के स्थान तथा व्यक्ति के साथ रहने की स्वतंत्रता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का इस्तेमाल किसी वयस्क बेटी को उसकी इच्छा के खिलाफ माता-पिता के साथ रहने के लिए मजबूर करने के मकसद से नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने कलावती देवी की याचिका खारिज कर दी।

 

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