ये है भारत का अनोखा गांव जो 2 देशों का हिस्सा!, मुखिया की हैं 60 पत्नियां, ओर…

नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई रेलवे स्टेशन या फिर जगहें हैं जो दो अलग-अलग राज्यों का हिस्सा हैं. इनमें आधी जगह एक राज्य में जबकि दूसरी जगह दूसरे राज्य में मौजूद है. मगर क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा भी गांव है जो भारत के अलावा दूसरे देश का भी हिस्सा है? इस वजह से यहां के लोगों के पास दोहरी नागरिकता भी है. हम बात कर रहे हैं नागालैंड के एक गांव की जहां एक अनोखी जनजाति रहती है.

नागालैंड का लोंगवा गांव अपनी अनोखी विशेषता की वजह से काफी फेमस है. इस गांव में कोन्याक जनजाति रहती है. ये गांव भारत के साथ-साथ म्यांमार का भी हिस्सा है. हैरानी की बात ये है कि बॉर्डर इस गांव के मुखिया और जनजाति के अध्यक्ष यानी राजा के घर से होकर गुजरता है. इस वजह से ऐसा कहा जाता है कि राजा अपने ही घर में खाता म्यांमार में है और सोता भारत में है. आउटलुक इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार राजा को ‘अंघ’ (Angh) कहते हैं जिसकी 60 पत्नियां हैं. वो अपने गांव के अलावा म्यांमार, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के 100 गांवों का भी राजा है.

आपको बता दें कि कोन्याक जनजाति को हेडहंटर कहा जाता था. हेडहंटर यानी वो प्रक्रिया जिसके तहत इन जनजाति के लोग एक दूसरे का सिर कलम कर के साथ ले जाते थे और अपने घरों में सजा लेते थे. मगर 1960 के वक्त से जब यहां ईसाई धर्म तेजी से फैला तो इस प्रथा को धीरे-धीरे खत्म कर दिया गया. सीएन ट्रेवलर वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार गांव में करीब 700 घर हैं और इस जनजाति की आबादी, दूसरी जनजातियों के मुकाबले ज्यादा है. गांव वाले आसानी से एक देश से दूसरी देश घूमते हैं.

कोन्याक लोग अपने चेहरे पर और शरीर के अन्य भागों पर टैटू बनाते हैं जिससे वो आसपास की दूसरी जनजातियों से अलग लगे. टैटू और हेडहंटिंग उनकी मान्यताओं का अहम हिस्सा है. जनजाति के राजा का बेटा म्यांमार आर्मी में भर्ती है और लोगों को दोनों देशों में आने-जाने के लिए वीजा-पासपोर्ट की भी जरूरत नहीं पड़ती. यहां नागमिस भाषा बोली जाती है, जो नागा और आसामी भाषा से मिलकर बनी है.

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