श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोहणी नक्षत्र का मिलेगा संयोग

लखनऊ: भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहणी नक्षत्र में अर्धरात्री में वृष राशि के चन्द्रमा में हुआ था। इस वर्ष 2 सितम्बर को भगवान श्री कृष्ण का 5245 जमोत्सव है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 2 सितम्बर सायंकाल 8:47 से प्रारम्भ होकर 3 सितम्बर को सायंकाल 7:19 तक है। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र का अष्टमी से संयोग भी 2 सितम्बर रात्रि को बन रहा है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र मिलने के कारण इसे कृष्ण जयंती भी कहते है।

स्मार्त अर्धरात्रि को पड़ रही अष्टमी वाले दिन जन्माष्टमी मनाते हैं जबकि वैष्णव अष्टमी की उदया तिथि को गोकुल अष्टमी नंदोत्सव मनाते है। स्मार्त 5 देवों भगवान विष्णु, शिव, दुर्गा, गणोश और सूर्य की उपासना करते है, जबकि वैष्णव अपने सम्प्रदाय के गुरु से गुरू दीक्षा लेकर कंठा, माला, तिलक आदि नियम पालन करते है और केवल वैष्णव उपासना करते है। मध्य रात्रि पूजा का शुभ मुहरूत रविवार रात 11:43 से 12:28 तक है। जन्माष्टमी में उपवास रखकर रात्रि में जागरण एवं भगवान का पूजन , भजन-कीर्तन से किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने ताड़का, पूतना, शकटासुर, कालिया नाग, नरकासुर, कंस, जरासंध, कालयवन , शिशुपाल, पौड्रक आदि असुरों का वध किया था। 3 सितम्बर को महाराष्ट्र, गुजरात में दही हांडी उत्सव मनाया जायेगा।

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