प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अब अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत पशु चिकित्सकों और पैरावेट कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे


लखनऊ: 16 जुलाई, 2026
पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (जुनोटिक रोगों) और नए उभरते पशु रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए, पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने 16-17 जुलाई 2026 को होटल मर्क्यार, गोमतीनगर, लखनऊ में पशु चिकित्सकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया है। प्रथम दिवस का प्रशिक्षण श्रीचपमहव के सहयोग से Jhpiego परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के 40 जिलों से 80 सरकारी पशु चिकित्सक ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री देवेंद्र कुमार पांडेय, विशेष सचिव, पशुपालन विभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (प्रशासन एवं विकास), डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक, पशुपालन विभाग तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर श्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि पशु चिकित्सक असामान्य पशु रोगों की पहचान करने वाले पहले प्रमुख अधिकारी (फर्स्ट रिस्पॉंडर) होते हैं। रोगों की शीघ्र पहचान, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला जांच, निगरानी, रिपोर्टिंग, पशुपालकों को जागरूक करना और रोग प्रकोप नियंत्रण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने और अपने-अपने जिलों में अन्य पशु चिकित्सकों एवं पैरावेट कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित करने का आग्रह किया।
दो दिनों के इस प्रशिक्षण में आईसीएआर-आईवीआरआई-बीएचयू तथा ANDUAT, कुमारगंज (अयोध्या) के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण रोगों पर तकनीकी सत्र लिए जा रहे हैं। इनमें रेबीज़, बर्ड फ्लू, लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस, सीसीएचएफ, एन्थ्रेक्स, स्क्रब टाइफस, ग्लैंडर्स, लंपी स्किन डिजीज, ब्रुसेलोसिस, साल्मोनेलोसिस और डर्माटोफाइटोसिस जैसे रोग शामिल हैं।
प्रशिक्षण में रोग निगरानी, मानकीकृत केस परिभाषाएं, प्रयोगशाला जांच, जैव-सुरक्षा, नमूना संग्रह, पैकिंग एवं परिवहन तथा रोग प्रकोप की जांच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी जा रही है।
राज्य स्तरीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दोनों चरणों में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के 150 सरकारी पशु चिकित्सकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अब अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत पशु चिकित्सकों और पैरावेट कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। इससे राज्य में पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (ज़ूनोटिक रोगों) तथा अन्य महत्वपूर्ण पशु रोगों की निगरानी, रोकथाम और नियंत्रण की क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
यह पहल पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की पशु चिकित्सकों की क्षमता बढ़ाने, पशु रोगों की निगरानी को मजबूत करने तथा ज़ूनोटिक रोगों के प्रकोप से निपटने की तैयारी को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह कार्य ’वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के तहत विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
