NEP 2020 पर बीबीएयू में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, विकसित भारत-2047 के लिए शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता पर हुआ मंथन

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में बुधवार को प्रबंध अध्ययन विभाग की ओर से ‘एनईपी 2020 : विकसित भारत के लिए शिक्षा में परिवर्तन और उत्कृष्टता को बढ़ावा’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों, बहुविषयक शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, मुंबई के सीईओ दीपक कुमार लल्ला, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह और कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा सहित कई शिक्षाविद मंच पर उपस्थित रहे।
‘बहुविषयक शिक्षा और नवाचार से बनेगा विकसित भारत’
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विकसित भारत-2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन का मूल आधार है और इसके माध्यम से ही आत्मनिर्भर एवं समावेशी भारत का निर्माण संभव है।
उन्होंने शिक्षा के तीन प्रमुख आयामों—’नोइंग’, ‘डूइंग’ और ‘बीइंग’—पर बल देते हुए कहा कि जब ये तीनों तत्व शिक्षा से जुड़ते हैं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने युवाओं से रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया और अनुसंधान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा उद्यमिता को विकसित भारत की आधारशिला बताया।

‘युवा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत’
मुख्य अतिथि प्रो. अमरपाल सिंह ने कहा कि युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को समझने के लिए उसके सामाजिक, ऐतिहासिक और संवैधानिक संदर्भों को जानना आवश्यक है। उनके अनुसार विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अधिवक्ता तैयार करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, उत्तरदायी और न्यायप्रिय नागरिकों का निर्माण करना भी है।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर दिया जोर
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस के सीईओ दीपक कुमार लल्ला ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने और विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच तथा रोजगारपरक कौशल विकसित करने पर बल दिया।

नई पुस्तक का हुआ विमोचन
संगोष्ठी के दौरान ‘स्वदेशी उद्यमिता : आत्मनिर्भर भारत की ओर एक सशक्त कदम’ विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक का संयुक्त लेखन कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की प्रो. सुनीता भर्तवाल और बीबीएयू की डॉ. लता बाजपेई ने किया है।
NEP 2020 के विभिन्न पहलुओं पर हुई पैनल चर्चा

कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज के निदेशक डॉ. काजल चक्रवर्ती, आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रिसर्च के डॉ. टी.के. श्रीवास्तव, आईसीएआर-सेंट्रल सॉइल सेलिनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ. अनूप कुमार दीक्षित और मेजर विराट मिश्रा ने अपने विचार रखे।
चर्चा के दौरान कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शिक्षा में बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने, फैकल्टी एक्सचेंज, स्टूडेंट एक्सचेंज और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को नवाचार एवं उद्यमिता बढ़ाने के लिए आवश्यक बताया।
तकनीकी और प्लेनरी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
संगोष्ठी में प्लेनरी सत्र और दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। प्लेनरी सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. संगीता सिंह, ओमान के मॉडर्न कॉलेज ऑफ बिजनेस एंड साइंस के डॉ. धर्मेंद्र सिंह, ओमैक्स लिमिटेड के अंजनी कुमार पांडेय तथा ताइवान की चाओयांग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के डॉ. विनोद कुमार ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
पहले तकनीकी सत्र में ‘राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा : विकसित भारत @2047’ विषय पर और दूसरे सत्र में ‘शासन, लोक नीति, नेतृत्व एवं प्रबंधन’ विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम के समापन पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं।
