हरियाणा सरकार द्वारा शीर्ष आईएएस अधिकारी के ट्रांसफर में देरी पर, बसपा सांसद ने एचएसवीपी में ‘अनियमितताओं’ की तरफ किया इशारा

 

नई दिल्ली: हरियाणा सरकार इस साल जून में केंद्र के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के निर्देशों के बावजूद, अपने एक शीर्ष आईएएस अधिकारी अजीत बालाजी जोशी, जो महत्वपूर्ण हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के प्रमुख हैं, के ट्रांसफर को लेकर दुविधा में है।

आईएएस अधिकारी को नियुक्ति समिति ने हरियाणा से पंजाब कैडर में ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन खट्टर सरकार ने राज्य में प्रशासकों की भारी कमी और साल के अंत तक 11 वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स के रिटायरमेंट का हवाला देते हुए, उनका ट्रांसफर रोक रखा है।

जबकि रिपोर्टों से पता चलता है कि अधिकारी के पास कुछ ‘महत्वपूर्ण कार्यों’ के कारण, उन्हे कुछ समय तक राज्य में बने रहने के लिए राजी किया जा रहा था, हालांकि अब लोकसभा सांसद रितेश पांडे ने उनके और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

अजीत बालाजी जोशी की निगरानी में एचएसवीपी में वित्तीय अनियमितताओं की श्रृंखला का आरोप लगाते हुए, बसपा सांसद का दावा है कि अधिकारियों ने रियल एस्टेट माफियाओं के साथ मिलकर काम किया है और उनके भ्रष्ट आचरण के कारण राज्य के खजाने को 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हुआ है।

उनका दावा है कि अधिकारी सरकारी स्वामित्व वाली भूमि को औने-पौने दामों पर बेच रहे हैं और इसलिए एचएसवीपी को भारीभरकम नुकसान हो रहा है। गुरुग्राम के सेक्टर 56 में एक एचएसवीपी अस्पताल की साइट के ई-नीलामी विवरण का हवाला देते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 में मैक्स हॉस्पिटल्स को 80 करोड़ रुपये की कीमत पर जमीन बेची गई थी, जबकि उसी प्लॉट को 2014 में 462 करोड़ रुपये की बोली मिली थी। इसी सौदे में अकेले ही 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

2003 बैच के आईएएस अधिकारी राज्य के कुछ सबसे हाई-प्रोफाइल विभागों के प्रमुख हैं। वह हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक हैं और पंचकुला महानगर विकास प्राधिकरण (पीएमडीए) के सीईओ भी हैं।

वहीं वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स को पंजाब कैडर में शिफ्ट किया जाना था, जहां उनकी पत्नी गौरी पराशर जोशी स्कूल एजुकेशन विभाग की विशेष सचिव के रूप में पोस्टेड हैं। उनकी पत्नी ओडिशा कैडर से हैं और शादी के आधार पर उन्हें इसी पंजाब कैडर में शिफ्ट किया जाना था।

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