एम्स रायबरेली ने ID-NAT सुविधा का उद्घाटन किया और ब्लड सेफ्टी पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) आयोजित किया

एम्स रायबरेली के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड सेंटर विभाग ने अपनी ‘इंडिविजुअल डोनर न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग’ (ID-NAT) सुविधा का उद्घाटन किया। साथ ही, इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (ISTM) के सहयोग से 5 अक्टूबर, 2026 को “ब्लड सेफ्टी को बढ़ावा देना: भारत में NAT की भूमिका” विषय पर एक सीएमई आयोजित किया।

NAT सुविधा का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अमिता जैन (कार्यकारी निदेशक और सीईओ, एम्स रायबरेली) ने किया। इस मौके पर प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी (डीन – एकेडमिक्स), डॉ. नीरज श्रीवास्तव (अपर चिकित्सा अधीक्षक), कर्नल अखिलेश सिंह (उप निदेशक – प्रशासन) और कर्नल उपेंद्रनाथ राय (वित्तीय सलाहकार) भी मौजूद थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने ब्लड सेफ्टी को मजबूत करने में न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (NAT) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि NAT ट्रांसफ्यूजन से फैलने वाले संक्रमणों (जैसे HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C) के जेनेटिक मटीरियल का पता लगाता है। इससे संक्रमण की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाती है, जबकि पारंपरिक एंटीबॉडी-बेस्ड टेस्ट शायद उस समय संक्रमण का पता न लगा पाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एम्स रायबरेली में NAT शुरू होने से मरीजों को दिए जाने वाले ब्लड और ब्लड कंपोनेंट्स की सुरक्षा और मजबूत होगी।
-------------------------------------------------------------------------------------------
प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी ने इस पहल की सराहना की और ट्रांसफ्यूजन सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
CME में कई विशेषज्ञों ने लेक्चर दिए, जिनमें PGIMER चंडीगढ़ के प्रो. (डॉ.) रत्ती राम शर्मा, SGPGIMS लखनऊ की प्रो. (डॉ.) प्रीति एल्हेंस, और SGPGIMS लखनऊ के प्रो. (डॉ.) अनुपम वर्मा शामिल थे। इन सेशन में ब्लड सेफ्टी, वैश्विक और भारतीय परिदृश्य, भारत में वर्तमान में उपलब्ध TTI टेस्टिंग टेक्नोलॉजी और भारत में NAT टेस्टिंग के सफर जैसे विषयों पर चर्चा की गई। यह कार्यक्रम एम्स रायबरेली के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड सेंटर विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। इसके आयोजन में डॉ. अरुण प्रीत कौर आयोजन अध्यक्ष, डॉ. ज्ञानेश्वर पटाले, आयोजन सचिव, डॉ. तृप्ति लोखंडे और श्री शेष कुमार भक्त के साथ ही पूरी विभागीय टीम भी शामिल थी।
यह कार्यक्रम एम्स रायबरेली में ब्लड सेफ्टी और ट्रांसफ्यूजन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
