विदेश

यूनीसेफ की चेतावनी: 100 देशों के 34.7 करोड़ से ज्यादा बच्चों पर मंडरा रहा गंभीर संकट, अल नीनो बढ़ाएगा खतरा

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने वैश्विक जलवायु संकट को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान के कारण दुनियाभर के मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। इसका सीधा असर भारत समेत करीब 100 देशों के 34.7 करोड़ से अधिक बच्चों की जिंदगी, स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ सकता है।

यूनीसेफ ने आशंका जताई है कि 2026-2027 का अल नीनो दुनिया में इसके सबसे गंभीर दौर में से एक साबित हो सकता है। इसके चलते कई क्षेत्रों में सूखा और कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।

सूखा और बाढ़ से बच्चों पर बढ़ेगा खतरा

यूनीसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति बन सकती है, जबकि कुछ जगहों पर अप्रत्याशित बाढ़ का खतरा है। इसका सबसे ज्यादा असर कमजोर परिवारों और बच्चों पर पड़ने की आशंका है।

सूखे की वजह से फसलें बर्बाद होने पर खाद्य संकट और गंभीर कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है और स्कूल बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है।

यूनीसेफ ने पहले से तैयारी करने की अपील की

यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के मुताबिक बच्चों के लिए अल नीनो महज मौसम में बदलाव नहीं है। इसके कारण भुखमरी, कुपोषण, साफ पानी की कमी और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

एजेंसी ने प्रभावित देशों से स्वच्छ पेयजल, जीवनरक्षक पोषण किट, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन राहत व्यवस्था को पहले से मजबूत करने की अपील की है, ताकि संभावित संकट के दौरान बच्चों को जरूरी मदद समय पर मिल सके।

-------------------------------------------------------------------------------------------

रिपोर्ट के अनुसार 40 प्राथमिकता वाले देशों में राहत और तैयारी के लिए 4.11 अरब डॉलर की जरूरत है। इसके मुकाबले अभी तक सिर्फ 1.28 अरब डॉलर की राशि मिली है। यानी जरूरत के मुकाबले 69 फीसदी फंड की कमी बनी हुई है।

भारत समेत एशिया-प्रशांत में 19 करोड़ बच्चे प्रभावित हो सकते हैं

यूनीसेफ की रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में बताया गया है। यहां भारत समेत करीब 19 करोड़ बच्चों के असामान्य सूखे या बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है।

पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में करीब 4.1 करोड़ तथा लैटिन अमेरिका में भी लगभग 4.1 करोड़ बच्चों पर इसका असर पड़ सकता है।

फिलीपींस, कोलंबिया, फिजी और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में गंभीर सूखे के कारण खेती प्रभावित होने और पानी की भारी कमी का खतरा है। वहीं सोमालिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने की आशंका है। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------