रोजाना कम सोने की आदत पड़ सकती है भारी, दिल से लेकर दिमाग तक पर पड़ता है असर
नई दिल्ली: अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद लेना उतना ही जरूरी है, जितना संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि। इसके बावजूद आजकल देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत इसकी बड़ी वजहों में शामिल हैं। लोग जानते हैं कि नींद पूरी नहीं होने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है, फिर भी अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसका असर दिल, दिमाग, रक्तचाप और शरीर के चयापचय पर पड़ सकता है। लगातार नींद की कमी कई बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकती है। आइए जानते हैं कि कम सोने से सेहत को किस तरह के नुकसान हो सकते हैं।
1. दिल की बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
लगातार कम नींद लेने से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। पर्याप्त नींद के दौरान शरीर को आराम मिलता है और रक्तचाप को नियंत्रित रखने वाली प्रक्रियाओं को मदद मिलती है। नींद पूरी न होने पर इन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने से दिल का दौरा और दूसरी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
2. मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त पर असर
नींद की कमी का सीधा असर दिमाग की कार्यक्षमता पर पड़ता है। पर्याप्त नींद न मिलने से ध्यान लगाने, नई चीजें सीखने और जानकारी याद रखने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, तनाव और मनोदशा में बदलाव जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक नींद की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
3. डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है
कम सोने से शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। नींद की कमी इंसुलिन के काम करने के तरीके पर असर डाल सकती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद न लेने पर भूख और खाने की इच्छा में बदलाव हो सकता है। ऐसे में मीठे और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की तरफ झुकाव बढ़ सकता है।
4. ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ा जोखिम
नींद और कैंसर के बीच संबंध को लेकर शोध जारी है। कुछ अध्ययनों में रात की पाली में लंबे समय तक काम करने और शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होने के बीच कुछ कैंसर के जोखिम से संबंध देखा गया है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि कम नींद लेने से सीधे ब्रेस्ट कैंसर हो जाता है। कैंसर का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है।

5. हड्डियों की सेहत पर पड़ सकता है असर
नींद शरीर की मरम्मत और कई जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है। लंबे समय तक नींद की कमी का संबंध हड्डियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से भी जोड़ा गया है। हालांकि, केवल कम सोने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं या जोड़ों में दर्द होने लगता है, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। हड्डियों की मजबूती के लिए संतुलित आहार, कैल्शियम और विटामिन-डी के पर्याप्त स्तर के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
कितनी नींद लेना है जरूरी?
पर्याप्त नींद की जरूरत उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर वयस्कों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। इसके लिए सोने और जागने का समय तय रखें, रात में मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें तथा सोने से पहले कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचें।
अगर पर्याप्त समय सोने के बावजूद लगातार थकान रहती है, रात में बार-बार नींद खुलती है या खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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