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सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन : प्रो. अजीत सिंह ने कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय को पुस्तक भेंट की

बरेली,29 अक्टूबर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. अजीत सिंह एवं ज्योति मदान द्वारा लिखित पुस्तक ‘Sustainable Development Goals: Issues, Challenges and Policy Perspectives’ का प्रकाशन हुआ है। यह पुस्तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, समकालीन चुनौतियों तथा नीतिगत दृष्टिकोणों पर केंद्रित है। पुस्तक का विषय वर्तमान वैश्विक आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में विशेष प्रासंगिकता रखता है।

इस अवसर पर प्रो. अजीत सिंह ने विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. अनिल कुमार राय से भेंट कर उन्हें पुस्तक प्रस्तुत की। कुलपति महोदय ने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रो. अजीत सिंह एवं ज्योति मदान को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा इसे विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं शोधपरक योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय में अकादमिक उत्कृष्टता, शोध एवं नवाचार को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं शोधार्थियों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण विषयों पर शोध एवं प्रकाशन के कार्य को विशेष बल दिया जा रहा है। सतत विकास जैसे समकालीन एवं वैश्विक महत्व के विषय पर यह पुस्तक इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।

वर्तमान समय में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समानता तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना विश्व समुदाय के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक गरीबी एवं असमानता को कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा सभी के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करना है। इसी परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक सतत विकास की अवधारणा और उससे संबंधित नीतिगत पहलुओं पर अकादमिक चर्चा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

पुस्तक का विषय आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, ऊर्जा की बढ़ती मांग, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तथा सामाजिक-आर्थिक विषमताएँ आज विकास की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए ऐसी प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है, जो आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्राथमिकता दें।

भारत जैसे विकासशील देश में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कृषि एवं ग्रामीण विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। विकास योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के उचित वितरण तथा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुस्तक का विषय इन व्यापक चुनौतियों को समझने के लिए उपयोगी अकादमिक आधार प्रस्तुत करता है।

प्रो. अजीत सिंह महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हैं। अर्थशास्त्र, कृषि एवं ग्रामीण विकास तथा समकालीन आर्थिक विषयों में उनकी अकादमिक रुचि रही है। सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पुस्तक का प्रकाशन उनके शैक्षणिक एवं शोधपरक योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह पुस्तक अर्थशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन, विकास अध्ययन तथा लोक नीति से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। इससे सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में आने वाली चुनौतियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और संभावित समाधानों पर अध्ययन एवं शोध को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

पुस्तक का प्रकाशन सतत विकास के प्रति अकादमिक जागरूकता बढ़ाने तथा आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह प्रयास विकास की ऐसी अवधारणा को समझने में सहायक हो सकता है, जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के हितों और संसाधनों के संरक्षण को भी महत्व दिया जाए।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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