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40 साल से पहले भी घेर सकती है डायबिटीज! युवाओं में बढ़ रहा खतरा, इन आदतों को सुधारना बेहद जरूरी

नई दिल्ली: डायबिटीज यानी मधुमेह अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के लोग भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान और मोटापा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जीवनशैली में सुधार करके ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

40 साल से कम उम्र के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में 40 साल से कम उम्र के डायबिटीज मरीजों की संख्या वर्ष 2016-17 में करीब 1.20 लाख थी, जो 2020-21 में बढ़कर 1.48 लाख से अधिक हो गई। यह लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि है। भारत में भी कम उम्र के लोगों में डायबिटीज को लेकर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए शुरुआत से ही खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।

मोटापा और गलत खानपान बढ़ा सकते हैं खतरा

कम उम्र में डायबिटीज होने के प्रमुख जोखिम कारकों में मोटापा और अस्वस्थ खानपान शामिल हैं। जंक फूड, अधिक चीनी, ज्यादा कैलोरी और वसा वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन वजन बढ़ा सकता है। अधिक वजन होने पर शरीर में इंसुलिन के प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

डायबिटीज का असर शरीर के कई अंगों पर

डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज यानी शुगर का स्तर बढ़ जाता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहने पर आंखों, किडनी, हृदय और नसों सहित शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। इस बीमारी के प्रबंधन के लिए मरीज की स्थिति के अनुसार दवाइयों, खानपान में बदलाव और कुछ मामलों में इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।

इंसुलिन शरीर में कैसे करता है काम?

इंसुलिन एक हार्मोन है, जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, ताकि उसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जा सके। यह लिवर को ग्लूकोज जमा करने का संकेत भी देता है, जिससे शरीर जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग कर सके।

डायबिटीज के कुछ मरीजों में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, जबकि कुछ में इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज की जरूरत के अनुसार दवाइयां या इंसुलिन देने की सलाह दे सकते हैं। इंसुलिन हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती, लेकिन जिन लोगों को इसकी जरूरत है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के इसे बंद नहीं करना चाहिए।

डाइट और व्यायाम से मिल सकती है मदद

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना जरूरी है। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और शारीरिक सक्रियता ब्लड शुगर के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं। जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके लिए सुरक्षित तरीके से वजन कम करना भी फायदेमंद हो सकता है।

खाने में शामिल करें पौष्टिक चीजें

डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, साबुत अनाज और उचित मात्रा में फल संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। मीठे पेय पदार्थों और अधिक चीनी वाली चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए डाइट का चुनाव उसकी सेहत, दवाइयों और शारीरिक गतिविधियों के अनुसार किया जाना चाहिए।

रोजाना 30 से 40 मिनट व्यायाम करना फायदेमंद

नियमित व्यायाम से शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसी गतिविधियां उपयोगी विकल्प हैं। अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी जरूरी है।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

बार-बार प्यास लगना, पेशाब अधिक आना, बिना वजह वजन घटना, थकान और धुंधला दिखाई देना डायबिटीज के संभावित लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार से बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

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