बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में “यंत्रजन्य खाद्य विश्लेषण का प्रायोगिक प्रशिक्षण” विषय पर आयोजित द्विदिवसीय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 26 नवंबर को खाद्य एवं पोषण विभाग की ओर से “यंत्रजन्य खाद्य विश्लेषण का प्रायोगिक प्रशिक्षण” विषय पर आयोजित द्विदिवसीय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र, लखनऊ के निदेशक डॉ. हरीश कुमार उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यक्रम नीति अधिकारी श्री निरंजन बरियार, गृह विज्ञान विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. यूवी किरण और खाद्य एवं पोषण विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. नीतू सिंह उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती और बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट करके उनका स्वागत किया गया। सर्वप्रथम संकायाध्यक्ष प्रो. यूवी किरण ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। इसके पश्चात कार्यक्रम संयोजक प्रो. नीतू सिंह ने सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में वास्तविक समानता तभी स्थापित हो सकती है, जब शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति तक सार्थक रूप से पहुँचे। क्योंकि शिक्षा न केवल ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व, विचारों और कार्यों को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।” इसी संदर्भ में उन्होंने पंचकोश सिद्धांत के अन्तर्गत अन्नमय कोश का उल्लेख करते हुए कहा कि पौष्टिक और संतुलित आहार मनुष्य के शारीरिक और मानसिक विकास की नींव है। प्रो. मित्तल ने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे ऐसी शोध करें जो न केवल समाज के लिए उपयोगी हो, बल्कि जिसकी आर्थिक महत्ता भी हो, ताकि अकादमिक ज्ञान सीधे राष्ट्र की प्रगति और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में योगदान दे सके। उन्होंने युवाओं को खाद्य क्षेत्र से जुड़े छोटे-छोटे व्यवसायों में आगे आने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि ऐसे उद्यम न केवल स्व-रोजगार को बढ़ावा देते हैं, बल्कि अन्य लोगों, विशेषकर महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा वर्ग नवाचार, उद्यमिता, कौशल विकास और स्वास्थ्य-सम्बंधित क्षेत्रों में अग्रसर होगा, तो विकसित भारत का लक्ष्य और भी सशक्त आधार पर आगे बढ़ सकेगा।
क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र, लखनऊ के निदेशक डॉ. हरीश कुमार ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष जोर देते हुए उद्यमिता, खाद्य परीक्षण के आधुनिक तरीकों तथा आत्मनिर्भर बनने के विभिन्न मार्गों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज का युवा यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी कौशल और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में दक्ष हो जाए, तो न केवल वह स्वयं रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इससे जोड़कर व्यापक स्तर पर परिवर्तन ला सकता है। डॉ. हरीश ने खाद्य सुरक्षा, खाद्य गुणवत्ता की जाँच के सरल एवं व्यावहारिक तरीकों तथा छोटे पैमाने के खाद्य-आधारित उद्यमों के बारे में कई उपयोगी परियोजनाएँ विद्यार्थियों के साथ साझा कीं, ताकि वे इन जानकारियों का वास्तविक जीवन में लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनाती हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में बेहतर करियर विकल्प चुनने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यक्रम नीति अधिकारी श्री निरंजन बरियार ने “Fortification of Rice Revolution in India” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में कुपोषण और एनीमिया की चुनौती को कम करने के लिए सरकार द्वारा चावल सुदृढ़ीकरण अभियान एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को अपने संबोधन में घोषणा की थी कि बीपीएल समूह को फोर्टिफ़ाइड चावल उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि पोषण की कमी से जूझ रहे परिवारों को संतुलित एवं गुणवत्तापूर्ण आहार सुनिश्चित हो सके। इसी प्रेरणा से खाद्य एवं पोषण विभाग द्वारा विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) संयुक्त राष्ट्र के साथ एक एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत पूरे उत्तर प्रदेश की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए तकनीकी स्टाफ यूनिट्स नियुक्त की गईं। अपने वक्तव्य में निरंजन जी ने सरकार द्वारा फोर्टिफ़ाइड चावल के तकनीकी वितरण की प्रक्रिया, उसकी आपूर्ति श्रृंखला तथा समुदाय तक पहुँचने की व्यवस्था को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान किस प्रकार लोगों के बेहतर स्वास्थ्य, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लक्ष्य के साथ लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि चावल सुदृढ़ीकरण अभियान न केवल स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, बल्कि यह भारत को पोषण-सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी सिद्ध हो रहा है।
इस अवसर पर कुलपति जी एवं अतिथियों द्वारा कार्यक्रम के सोवेनियर का विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए ‘खाद्य अधिकार एवं दायित्व (Food Rights and Responsibilities) विषय पर क्विज प्रतियोगिता एवं ‘सभी के लिए पोषण: फोर्टिफाइड चावल के माध्यम से समुदाय को सशक्त बनाना (Nutrition for All: Strengthening Community through Fortified Rice) विषय पर लीफलेट और पैम्फलेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साथ ही विद्यार्थियों द्वारा खाद्य अधिकार एवं दायित्व विषय पर एक समृद्ध और आकर्षक प्रदर्शनी का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विविध मॉडलों, पोस्टरों और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने का सार्थक प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त कुलपति जी एवं अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों के लिए ‘Hands-on Instrumental Food Analysis Traning’ शीर्षक पर तैयार लर्निंग मैटेरियल का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही डॉ. माधवी डेनियल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
समस्त कार्यक्रम के दौरान प्रो. शालिनी अग्रवाल, प्रो. शिल्पी वर्मा, डॉ. माधवी डेनियल, डॉ. आशीष जाटव, डॉ. प्रियंका शंकर, अन्य शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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