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सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर जागरूकता कार्यशाला का किया गया आयोजन

 

बरेली, 11 फरवरी। अपर जिलाधिकारी नगर सौरभ दुबे की अध्यक्षता में कल safer internet day (सुरक्षित इंटरनेट दिवस) पर स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प, एआई के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को लेकर  जिला स्तर पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में किया गया।

कार्यशाला में विभिन्न इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित ऑनलाइन प्रथाओं, साइबर स्वच्छता, प्रमुख साइबर खतरों आदि के बारे में जानकारी देने साथ ही नागरिकों के बीच सुरक्षित इंटरनेट के उपयोग को बढ़ावा देने के उददेश्य से जानकारी दी गयी।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि सुरक्षित इंटरनेट दिवस हर साल फरवरी के दूसरे मंगलवार को दुनियाभर में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इंटरनेट के सुरक्षित और जिम्मेदारी पूर्वक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस कार्यशाला में पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन तथा विभिन्न वीडियो के माध्यम से जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मो0 सिबतेन एवं अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कृष्ण मुरारी द्वारा साइबर जगत में होने वाले फ्रॉड व अन्य खतरों की जानकारी देने के साथ-साथ उनसे बचाव के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया। ऑनलाइन सुरक्षा कवच के अंतर्गत बताया गया कि कभी भी कॉल्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी जैसे ओ0टी0पी0, आधार, पेन या बैंक विवरण साझा न करें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा न करें और अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखें। कभी भी अज्ञात नंबरों से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें। उच्च लाभ के प्रति प्रेरित करने वाले ऑनलाइन निवेश ऑफरों से बचें व कोई सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी आदि वीडियो या वॉयस कॉल्स के माध्यम से आपकी जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती। सतर्क रहें कभी भी भुगतान प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन या ओटीपी/पिन साझा न करें, ये स्कैम के तरीके हो सकते हैं।

संवेदनशील लेन-देन जैसे बैंकिंग, कानून स्वास्थ्य संबंधित जानकारी इत्यादि के लिए सार्वजानिक वाईफाई का उपयोग करने से बचे। अपने मोबाइल पर ऐप्स की नियमित जाँच करें, अनावश्यक अनुमतियाँ रद्द करें और अनुपयोगी ऐप्स को हटा दें। https सिक्योर वेबसाइट होती है केवल http वाली वेबसाइट फर्जी भी हो सकती हैं, फर्जी नाम या डोमेन वाली वेबसाइट न खोलें, फोन नंबर से मांगी गई धनराशि किसी को देने से बचें, मांगने वाला फर्जी हो सकता है, मजबूत पासवर्ड सेट करें, डबल फैक्टर ऑथेन्टिकेशन अपनाएं, विश्वसनीय श्रोतों से ही ऐप्स डाउनलोड करें।

साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 एवं वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कार्यशाला में उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट और एआई के सुरक्षित व जिम्मेदार उपयोग के प्रति संवेदनशील बनाना है। साइबर हाइजीन (Cyber Hygiene) के सर्वोतम अभ्यासों को बढ़ावा देना। प्रमुख साइबर खतरों और उनके निवारण तकनीकों के बारे में शिक्षित करना। साथ ही नागरिकों के बीच सुरक्षित इंटरनेट के उपयोग को बढ़ावा देना है। Cyber शब्द आजकल कॉमन प्रचलित शब्द हो चुका है, जिसका तात्पर्य डिजिटल दुनिया यानि कंप्यूटर, इन्टरनेट, मोबाइल नेटवर्क आदि से है, हम अक्सर साइबर क्राइम, साइबर सिक्यूरिटी, साइबर अटैक आदि के विषय में सुनते रहते हैं। इसी के साथ साइबर फ्रॉड के विषय में भी काफी चर्चा सुनने या अखबारों में पढ़ने को मिलती रहती है, जोकि इन्टरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी डिजिटल माध्यम से किसी को धोखा देना, ढगना या उसकी जानकारी अथवा पैसे हड़प लेना होता है

कार्यशाला में बताया गया कि साइबर फ्रॉड के बहुत से तरीके अपनाये जाते हैं जैसे- नकली ईमेल या वेबसाइट के जरिये पासवर्ड या बैंक डिटेल चुराना जिसे फिशिंग कहते हैं, किसी को झांसे में रखकर ओटीपी लेकर पैसा निकाल लेना जिसे ओटीपी फ्रॉड कहते हैं, झूठे लिंक या क्यूआर कोड भेजकर पैसे ट्रांसफर करा लेना जिसे यूपीआई/बैंक स्कैम कहते हैं, नकली वेबसाइट से सामान के नाम पर पैसा लेकर गायब हो जाना जिसे ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड कहते हैं, नौकरी या लोन दिलाने के नाम पर पैसा ठगना जिसे जॉब/लोन फ्रॉड कहते हैं, किसी की पहचान (आधार, पैन, फोटो आदि) का गलत इस्तेमाल करना जिसे आइडेंटिटी थेफ्ट कहते हैं। साइबर फ्रॉड से बचाव के तरीके जैसे-कभी भी ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी से शेयर न करें। अजनबी लिंक या क्यूआर कोड पर क्लिक न करें। सरकारी या बैंक वेबसाइट हमेशा असली यूआरएल से खोलें।

कार्यशाला में बताया गया कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी सुरक्षित इंटरनेट का उपयोग करें तथा अपने हर्द गिर्द के लोगों को भी जागरूक करें, कि संदिग्ध ईमेल लिंक, एसएमएस, मोबाइल कॉल इत्यादि से दिए जाने प्रलोभनों से बचें, अपनी निजी जानकारी, पासवर्ड आदि दूसरों से शेयर न करें।

इस कार्यशाला में साइबर क्राइम के इंस्पेक्टर नीरज सिंह ने मुख्यतः अज्ञानता, डर व लालच ऐसे कारण है जिनकी वजह से आम व्यक्ति साइबर फ्राड का शिकार हो जाता है। इसलिए डिजिटल अरेस्ट या कोई अन्य धमकियों से न डरे, ऐसा होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें। सॉफ्टवेयर और ऐप को नियमित रूप से अपडेट करें, सार्वजनिक वाईफाई से ऑनलाइन बैंकिंग का कार्य न करें, मजबूत पासवर्ड सेट करें। अनावश्यक धनराशि या सुविधाएं देने वाले प्रलोभनो में ना आएं।साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपराध कि जानकारी दें।

कार्यशाला में नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मो0 सिबतेन एवं अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कृष्ण मुरारी, जिला सूचना अधिकारी नीतू कनौजिया, साइबर क्राइम के इंस्पेक्टर नीरज सिंह सहित समस्त आई टी आई बरेली के शिक्षक व छात्र/छात्राये और जनसेवा केंद्र के संचालकगण व क्लक्ट्रेट के कर्मचारी गण उपस्थित रहे। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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