होली पर ग्रहण की छाया, चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को नहीं उड़ेगा गुलाल

मुरादाबाद। फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहे चंद्रग्रहण की वजह से इस साल होली की तिथियों में बदलाव किया गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च की रात भद्रा के पुच्छ काल में होगा, जबकि 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल के चलते रंगों की होली स्थगित रहेगी। ऐसे में रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।
होलिका दहन का शास्त्रसम्मत मुहूर्त तय
ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 5:30 बजे तक रहेगी। शास्त्रों, विशेष रूप से निर्णय सिंधु के अनुसार भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन शुभ माना जाता है। इस वर्ष 2 मार्च की रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
भद्रा के मुख काल में दहन वर्जित
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि भद्रा के मुख काल में होलिका दहन करना शास्त्रों में वर्जित है, जबकि पुच्छ काल मंगलकारी माना गया है। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से 2 मार्च की मध्यरात्रि में ही विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा और श्रद्धालुओं को निर्धारित मुहूर्त का पालन करने की सलाह दी गई है।
3 मार्च को रहेगा चंद्रग्रहण और सूतक काल

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा। ग्रहण से नौ घंटे पहले सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। चंद्रोदय लगभग शाम 5:59 बजे होगा, लेकिन उससे पहले ही ग्रहण लग चुका होगा। भारत में ग्रहण का मोक्ष काल ही स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि चंद्रमा पृथ्वी की छाया के कारण धुंधला नजर आएगा।
4 मार्च को ही खेली जाएगी रंगों की होली
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल में शुभ कार्य करना निषिद्ध होता है। इसी वजह से 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी और देशभर में 4 मार्च को धूमधाम से रंगोत्सव मनाया जाएगा।
कहां-कहां दिखेगा चंद्रग्रहण
यह खग्रास चंद्रग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक द्वीपों के साथ उत्तर और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा। भारत में विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में इसका स्पष्ट प्रभाव दिखेगा। इसके अलावा कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर, आइजोल सहित दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, उत्तर प्रदेश और जयपुर में भी यह आंशिक रूप से नजर आएगा।


