मजदूर मां की मेहनत रंग लाई: जोधपुर की अनीता देवड़ा ने UPSC में पाई 644वीं रैंक, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करना हर युवा का सपना होता है, लेकिन इसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और मजबूत हौसले की जरूरत होती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी राजस्थान के जोधपुर जिले की अनीता देवड़ा की है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 644वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।

UPSC 2025 का रिजल्ट जारी
हाल ही में Union Public Service Commission ने सिविल सर्विस परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित किया है। इस परीक्षा में कुल 958 अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न सेवाओं के लिए हुआ है। इस बार राजस्थान के कई युवाओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें Anita Devda का नाम भी शामिल है, जिन्होंने ऑल इंडिया रैंक 644 हासिल की।
मां की मेहनत ने पूरे किए सपने
जोधपुर जिले के भोपालगढ़ क्षेत्र की रहने वाली अनीता देवड़ा ने बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर यह मुकाम हासिल किया है। उनके पिता Shyamlal Devda एक किसान हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन अनीता की मां ने खेतों में मजदूरी करके बेटी की पढ़ाई जारी रखी।
मां ने एक-एक पैसा जोड़कर अनीता को आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजा, ताकि वह अपने सपने को पूरा कर सके। आज अनीता की सफलता में उनकी मां की मेहनत और त्याग सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है।

12वीं में ब्लॉक स्तर पर किया था टॉप
अनीता ने भोपालगढ़ के सैनी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। पढ़ाई में शुरू से ही तेज अनीता ने 12वीं कक्षा में ब्लॉक स्तर पर टॉप किया था। उसी समय उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें आगे चलकर IAS बनना है।
इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और UPSC परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। वर्षों की लगन और संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिल ही गई।
परिवार में शिक्षा का माहौल
अनीता के परिवार में शिक्षा को हमेशा महत्व दिया गया है। उनके रिश्ते में एक चाचा Chetan Devda सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी रेलवे, प्रशासनिक सेवाओं, प्रोफेसर और ग्राम विकास अधिकारी जैसे पदों पर कार्यरत हैं।
अनीता की इस उपलब्धि से भोपालगढ़ क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे जोधपुर जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। परिवार और स्थानीय लोग इसे मेहनत, संघर्ष और सपनों की जीत बता रहे हैं।
