Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में महिला सशक्तिकरण हेतु विचार मंच आयोजित

बरेली,21अप्रैल। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग स्थित प्रो. एस. बी. सिंह ऑडिटोरियम में कल “शैक्षणिक उपाधियों से आगे: वित्तीय साक्षरता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक भव्य विचार मंच (थॉट कॉन्क्लेव) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक कुलपति प्रो. के. पी. सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं पुष्पगुच्छ भेंट के साथ हुआ, जिसके उपरांत “नारी शक्ति: साहस और परिवर्तन का गीत” की प्रस्तुति ने वातावरण को प्रेरणादायक बना दिया।

स्वागत भाषण में प्रो. अर्चना गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में केवल उच्च शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं का वित्तीय रूप से सशक्त होना भी अत्यंत आवश्यक है। वहीं प्रो. शोभना सिंह ने मिशन शक्ति के अंतर्गत चल रही योजनाओं की जानकारी दी। प्रो. अनीता त्यागी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसे अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।

थॉट कॉन्क्लेव सत्र कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं ने अपने विचार रखे। पुष्पलता गुप्ता ने कहा कि “अक्षमता अभिशाप नहीं, बल्कि एक चुनौती है।”उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह बनाकर छोटे व्यवसाय शुरू कराने और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की पहल साझा की।

अमिता अग्रवाल ने बताया कि उनके संस्थान की लगभग 40% सप्लाई स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से होती है और महिलाओं के सम्मान एवं आत्मनिर्भरता पर बल दिया।

वित्तीय साक्षरता पर प्रकाश डालते हुए नेहा साहनी ने ऑनलाइन लेन-देन में सतर्कता और पोर्टल की प्रामाणिकता जांचने की आवश्यकता बताई। डॉ. सीमा सिंह ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर खर्च न कर पाने की समस्या को गंभीर चिंता का विषय बताया।

खेल जगत से आईं शालिनी गोयल ने कहा कि “महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ अवसरों तक पहुंच है”और उन्होंने यह भी जोर दिया कि स्कूल स्तर से ही वित्तीय साक्षरता, संपत्ति अधिकार (Property Rights) और वित्तीय अधिकारों की शिक्षा दी जानी चाहिए।

रामनदीप कौर ने वित्तीय प्रबंधन का “50-30-20” सूत्र साझा करते हुए संतुलित खर्च और बचत की आवश्यकता बताई। पुष्पा सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की पहल पर प्रकाश डाला।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करते हुए Chiali Chen ने वैश्विक बाजार के उदाहरणों से वित्तीय ज्ञान की आवश्यकता बताई। जया चावला ने व्यापारिक नुकसान के बाद अपने संघर्षों को साझा करते हुए बजट और संयमित खर्च को सफलता की कुंजी बताया। तरुणा यादव ने बचपन से बचत और “Saving-Spending Ratio” के महत्व पर जोर दिया।

इस दौरान शारदा भार्गव ने कहा कि महिलाओं की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी आर्थिक निर्भरता है और आत्मनिर्भरता उन्हें अधिक सशक्त बनाती है। आरोही शर्मा ने मीडिया के माध्यम से वित्तीय जागरूकता बढ़ाने हेतु पॉडकास्ट जैसे माध्यम सुझाए।

डॉ. शशि राठी ने कहा कि वित्तीय साक्षरता कला क्षेत्र में भी उतनी ही आवश्यक है और महिलाओं के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।

कार्यक्रम में डॉ. प्रिया सक्सेना, डॉ. इंदरप्रीत कौर, डॉ. इराम नईम, डॉ. प्रीति यादव, डॉ. हेमा वर्मा एवं डॉ. ज्योति पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

थॉट कॉन्क्लेव की प्रभावी एंकरिंग डॉ. मीता गुप्ता एवं अपूर्वा द्वारा की गई, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन लवी प्रभु ने किया।

कार्यक्रम में “नुक्कड़ नाटक – नारी शक्ति: सोच से सम्मान तक” का मंचन भी किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।

इस अवसर पर निशा, सिन्शुओपा, अफरीन, नेहा तथा अनिल श्रवण सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अंत में कुलपति प्रो. के. पी. सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा के साथ-साथ वित्तीय समझ और प्रबंधन अनिवार्य है। कार्यक्रम का समापन स्मृति चिन्ह वितरण एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. तुलिका सक्सेना द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का निष्कर्ष यही रहा कि वित्तीय साक्षरता ही महिला सशक्तिकरण की सच्ची नींव है, जो समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

---------------------------------------------------------------------------------------------------