ईरान में सत्ता के शीर्ष पर घमासान! राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस्तीफे की पेशकश की, फैसलों से अलग-थलग किए जाने का आरोप
नई दिल्ली: ईरान की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कथित तौर पर अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे सर्वोच्च नेतृत्व के कार्यालय को भेजा है। इस कदम को ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का खुला संकेत माना जा रहा है।
फैसला लेने की प्रक्रिया से दूर किए जाने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपने इस्तीफे में गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार और राष्ट्रपति पद को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णयों से लगातार दूर रखा गया। उनका आरोप है कि शासन व्यवस्था में पैदा हुए इस खालीपन का लाभ कट्टरपंथी समूहों ने उठाया, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्वाचित सरकार की भूमिका सीमित होती चली गई।
बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि देश के अनेक मामलों में सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ गया है और निर्णय प्रक्रिया पर उनका नियंत्रण मजबूत हुआ है। इसी कारण सरकार की प्रभावी भूमिका प्रभावित हुई है।
सरकार चलाना हुआ मुश्किल, पद छोड़ने की जताई इच्छा
रिपोर्ट्स के अनुसार पेजेशकियन ने मौजूदा परिस्थितियों में अपनी संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन बताया है। उन्होंने कहा है कि जब निर्णय लेने की शक्ति सीमित हो जाए तो सरकार का संचालन प्रभावी ढंग से संभव नहीं रह जाता। इसी वजह से उन्होंने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की इच्छा जताई है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनके इस्तीफे को स्वीकार किया जाएगा या नहीं। लेकिन इस्तीफे की पेशकश से ईरान के सत्ता तंत्र में मौजूद मतभेदों और अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई है।

महीनों से बढ़ रहा था टकराव
जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ। पिछले कई महीनों से सरकार और सैन्य-सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार धीरे-धीरे राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती की गई और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रभावी नियंत्रण अन्य संस्थाओं के हाथों में चला गया।
इसी स्थिति के कारण पेजेशकियन प्रशासन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का सामना कर रहा था। बताया जा रहा है कि इससे न केवल कूटनीतिक स्तर पर बातचीत प्रभावित हुई, बल्कि सरकार के भीतर प्रस्तावित कई प्रशासनिक बदलाव भी आगे नहीं बढ़ सके।
सत्ता संघर्ष की चर्चाओं ने पकड़ा जोर
राष्ट्रपति की इस्तीफे की पेशकश की खबर सामने आने के बाद ईरान की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सत्ता संरचना और विभिन्न संस्थाओं के बीच शक्ति संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
