एसडीजी की राह पर बीबीएयू : शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से विश्वविद्यालय गढ़ रहा सतत् एवं समावेशी भविष्य

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा सतत विकास लक्ष्यों को संस्थागत व्यवस्था, शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक सहभागिता तथा प्रशासनिक नीतियों में प्रभावी रूप से समाहित करने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय द्वारा एसडीजी सहभागिता को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, संस्थागत पारदर्शिता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल का मानना है कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में सतत् विकास लक्ष्यों की दिशा में हमारी यात्रा केवल एक रणनीतिक प्राथमिकता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और समावेशी प्रगति जैसे हमारे मूल्यों का प्रतिबिंब है। शिक्षा, अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से विश्वविद्यालय ऐसे नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो स्थानीय से वैश्विक स्तर तक सतत परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेंगे। विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को केवल शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से संवेदनशील, पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना है।
विश्वविद्यालय का विजन है कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, नीति निर्माण, ज्ञान सृजन और सतत् विकास के वाहक होते हैं। इसी दृष्टिकोण के साथ विश्वविद्यालय ने अपने शिक्षण, शोध एवं विस्तार गतिविधियों को सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूप विकसित करने की रणनीति तैयार की है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, उद्यमिता, ग्रामीण विकास तथा नवाचार जैसे विषयों पर केंद्रित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
सतत् विकास लक्ष्य समिति के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने जानकारी देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने सतत् विकास लक्ष्यों को लेकर दीर्घकालिक और व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की है। इसके अंतर्गत सभी विभागों को उनके विषय एवं विशेषज्ञता के अनुरूप सतत् विकास लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। प्रत्येक विभाग में शिक्षकों को एसडीजी समन्वयक के रूप में नामित किया गया है, जो विभागीय स्तर पर गतिविधियों की निगरानी एवं संचालन कर रहे हैं। साथ ही छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक विभाग से एक छात्र एवं एक छात्रा को ‘सस्टेनेबल एम्बेसडर’ नियुक्त किया गया है, जो लैंगिक समानता की भावना के साथ सतत् विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता फैलाने एवं विभिन्न गतिविधियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में एमपीडीसी के माध्यम से सतत् विकास लक्ष्यों से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों में इन लक्ष्यों के प्रति बुनियादी समझ एवं व्यवहारिक जागरूकता विकसित हो सके। इसके अतिरिक्त प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एसडीजी लिट्रेसी मॉड्यूल प्रारंभ करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी प्रारंभिक स्तर से ही सतत विकास की अवधारणा को समझ सकें। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का सतत् विकास लक्ष्यों एवं संकेतकों के अनुरूप व्यवस्थित रूप से मैपिंग की जा रही है। इसमें गरीबी उन्मूलन (SDG-1), भूखमुक्त समाज एवं पोषण सुरक्षा (SDG-2), उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण (SDG-3), गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (SDG-4), लैंगिक समानता (SDG-5), स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG-6), स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा (SDG-7), गरिमामय कार्य एवं आर्थिक विकास (SDG-8), उद्योग एवं नवाचार (SDG-9), असमानताओं में कमी (SDG-10), सतत शहर एवं समुदाय (SDG-11), जिम्मेदार उपभोग (SDG-12), जलवायु कार्रवाई (SDG-13), भूमि एवं जैव विविधता संरक्षण (SDG-15) तथा शांति, न्याय एवं सशक्त संस्थानों (SDG-16) जैसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय आउटकम बेस्ड एजुकेशन प्रणाली के माध्यम से कोर्स आउटकम एवं प्रोग्राम आउटकम को भी एसडीजी के अनुरूप विकसित कर रहा है।
विश्वविद्यालय में अंतरविषयी एवं अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत फील्ड विजिट, सामुदायिक परियोजनाएं, केस स्टडी, समस्या-आधारित अधिगम, जल प्रबंधन सर्वेक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तथा कृषि आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही कौशल विकास, उद्यमिता एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देकर विशेष रूप से आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय गरीबी उन्मूलन, सतत कृषि, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन तथा सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर शोध कार्यों को प्रोत्साहित कर रहा है। विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन एवं नवाचार केंद्रों के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां सौर ऊर्जा, बायोफ्यूल, जल शुद्धिकरण, अपशिष्ट जल उपचार, क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि, स्मार्ट सिटी समाधान एवं पर्यावरणीय तकनीकों पर कार्य किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय द्वारा ‘लैब टू लैंड’ दृष्टिकोण अपनाते हुए शोध को समाज से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं एवं समाज के वंचित वर्गों के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क, पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता, विधिक जागरूकता शिविर तथा सामुदायिक पुस्तकालय जैसी पहलों के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विकास को गति दी जा रही है।
विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरणीय संरक्षण एवं हरित विकास को बढ़ावा देने हेतु वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण, ऊर्जा दक्षता, सौर ऊर्जा उपयोग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, हरित अवसंरचना तथा सर्कुलर इकॉनमी आधारित व्यवस्थाओं को विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर को ग्रीन एवं क्लाइमेट रेजिलिएंट कैंपस के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सतत् विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विश्वविद्यालय में समय-समय पर विशेष व्याख्यान, छात्र संवाद कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता, क्विज, वाद-विवाद प्रतियोगिता, पौधरोपण अभियान, स्वच्छता अभियान, पोषण संबंधी कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण गतिविधियां एवं सामुदायिक सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप बहुविषयी शिक्षा, लचीली शिक्षण प्रणाली एवं समावेशी अकादमिक वातावरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा SDGs के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु विभागीय समन्वयकों एवं विद्यार्थी एम्बेसडरों की संरचना विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। साथ ही विभागीय स्तर पर एसडीजी संकेतकों एवं की परफार्मेंस इंडीकेटर्स (KPIs) आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड एवं डेटा-आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।
भविष्य की कार्ययोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय में एसडीजी हब स्थापित करने की दिशा में पहल की जाएगी, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध गतिविधियां एवं नवाचार आधारित कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही जल संरक्षण एवं पुनर्स्थापन, कार्बन न्यूट्रल परिसर, सौर ऊर्जा विस्तार, कौशल विकास, अंतरविषयी शिक्षा, वैश्विक सहयोग तथा सामुदायिक पहुंच को और अधिक मजबूत करने की दिशा में विश्वविद्यालय निरंतर कार्य करेगा।
विश्वविद्यालय सतत विकास लक्ष्यों को शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के साथ जोड़कर एक न्यायपूर्ण, समावेशी, आत्मनिर्भर एवं पर्यावरणीय रूप से संतुलित समाज की स्थापना करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी संकल्प के साथ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बेहतर, सुरक्षित एवं सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2015 में विश्व के समक्ष सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) प्रस्तुत किए गए थे, जिन्हें विश्व के लगभग सभी देशों की सहमति से अपनाया गया। इन 17 वैश्विक लक्ष्यों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल एवं ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला, सतत आर्थिक विकास तथा सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। इन लक्ष्यों को मानवता, पर्यावरण और विकास के मध्य संतुलन स्थापित करने की एक वैश्विक कार्ययोजना के रूप में देखा जाता है, जिसका मूल उद्देश्य “Leave No One Behind” अर्थात समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।


