Monday, May 25, 2026
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राज्यलखनऊ

“अश्वमेघ धर्म ध्वज यात्रा” का हुआ भव्य शंखनाद


धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकता एवं राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में उमड़ा उत्साह।   विजयदशमी के पावन अवसर पर यात्रा 20 अक्टूबर से प्रारंभ होगी “अश्वमेघ धर्म ध्वज यात्रा”, चारों दिशाओं में संचालित होने वाली यह महायात्रा कुल 11,800 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। * धार्मिक जागृति एवं युवा चेतना का संदेश लेकर आगे बढ़ी महायात्रा। * शिवाश्री ऋतु ने कहा – यह यात्रा हरिहर स्वरूप एवं सनातन एकता का दिव्य अभियान है।

इस कार्यक्रम में पूज्य जन्मेजय शरण जी महाराज (रसिक पीठाधीश्वर, जानकी घाट बड़ा स्थान मंदिर, अयोध्या) एवं आचार्य डॉ. संतोष जी महाराज (धर्मगुरु एवं धर्म प्रचारक) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित होटल आरिफ कैसल में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। यह कॉन्फ्रेंस अश्वमेध धर्म ध्वजा यात्रा के संबंध में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में संतों, श्रद्धालुओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया।

शिवाश्री ऋतु ने कहा कि इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बनना उनके लिए भगवान शिव का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की विजय में महादेव का विशेष आशीर्वाद रहा है, इसलिए यह यात्रा हरिहर स्वरूप बनकर सनातन एकता का संदेश दे रही है।राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी यादों को साझा करते हुए अमरजीत मिश्रा ने कहा कि उनका पूरा जीवन प्रभु श्रीराम को समर्पित है। वहीं, वेद प्रकाश ने बताया कि यह उनका पहला राष्ट्रीय आध्यात्मिक अभियान है, जिसके माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना का प्रसार हुआ है।

कार्यक्रम में अयोध्या से पहुंचे संत जन्मेजय शरण और आचार्य डॉ. संतोष विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों संतों ने सनातन संस्कृति और युवा चेतना को मजबूत बनाने पर जोर दिया।इस मौके पर जानकी घाट बड़ा मंदिर रसिक पीठाधीश्वर संत जन्मेजय शरण ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानव जीवन का आधार है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का शुभारंभ 20 अक्टूबर, विजयदशमी के दिन किया जाएगा। यात्रा चार चरणों में पूरी होगी और लगभग 11,800 किलोमीटर की होगी। यह यात्रा पैदल, वाहन और ट्रेन के माध्यम से पूरी की जाएगी।

यात्रा का प्रथम चरण दिल्ली से शुरू होकर मथुरा, आगरा, धौलपुर, ग्वालियर, झांसी, उज्जैन, नासिक, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, उदयपुर और जयपुर होते हुए पुणे पहुंचेगा तथा वहां से दिल्ली में समाप्त होगा। यात्रा का दूसरा चरण दिल्ली से शुरू होकर बीकानेर, पटियाला, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, जम्मू, चंडीगढ़, देहरादून, हरिद्वार, मेरठ और गाजियाबाद होते हुए पुनः दिल्ली में समाप्त होगा।यात्रा का तीसरा चरण दिल्ली से शुरू होकर बरेली, अयोध्या, पटना, कोलकाता, रांची, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, फिरोजाबाद और नोएडा होते हुए दिल्ली में समाप्त होगा।

यात्रा का चतुर्थ चरण ट्रेन के माध्यम से दिल्ली से रामेश्वरम और पुणे होते हुए पुनः दिल्ली में समाप्त होगा। सभी चरणों में निर्धारित स्थानों पर अश्वमेध धर्म यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम त्याग, सेवा और मर्यादा के प्रतीक हैं तथा युवाओं को उनके आदर्शों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह यात्रा देश के युवाओं को भारतीय संस्कृति और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

चक्रवर्तुला रमणाचा ने कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से धर्म सेवा से जुड़ा रहा है और यह यात्रा उनके लिए आध्यात्मिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह ने कहा कि इस अभियान ने युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया है। थाईलैंड से विनोद हांडा ने शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि यह महाअभियान वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाएगा। आचार्य डॉ. संतोष ने श्रद्धालुओं और युवाओं से धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में आगे आने का आह्वान किया।

अमरजीत मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के संघर्षों की स्मृतियां आज भी उनके जीवन में जीवित हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन प्रभु श्रीराम को समर्पित है तथा यह यात्रा उनके लिए केवल अभियान नहीं बल्कि एक कर्तव्य है।

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