अब आसमान से भी ऑपरेशन में उतरेंगे सेना के कॉम्बैट डॉग्स, पैराशूट जंप से लेकर बुलेटप्रूफ वेस्ट तक खास तैयारी
नई दिल्ली: भारतीय सेना के कॉम्बैट डॉग्स अब जमीन पर होने वाले अभियानों के साथ एयरबोर्न ऑपरेशंस के लिए भी तैयार किए जा रहे हैं। सेना के इन प्रशिक्षित कुत्तों को पैराशूट से उतरने की ट्रेनिंग दी जा रही है। हाल ही में सेंट्रल इंडिया के बेहट ड्रॉप जोन में एक आर्मी पैराट्रूपर ने डॉग हैंडलर और उसके कॉम्बैट डॉग के साथ टैंडम पैराशूट जंप किया। इस दौरान कुत्ता भी पूरा कॉम्बैट लोड लेकर पैराशूट से नीचे उतरा।
डॉग हैंडलर के साथ टैंडम जंप की ट्रेनिंग

सेना के मुताबिक, डॉग हैंडलर और उसके कैनाइन साथी की इस तरह की टैंडम जंप शुरुआती उदाहरणों में से एक है। यह इससे पहले किए गए फ्री-फॉल जंप के सिलसिले को आगे बढ़ाती है, जिनमें सेना के कुत्ते भी शामिल रहे हैं। सेंट्रल कमांड ने इसे सैनिक और उसके कुत्ते के बीच भरोसे, टीमवर्क और मजबूत तालमेल का उदाहरण बताया है।
इस ट्रेनिंग के जरिए कॉम्बैट डॉग्स को ऐसे अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां सैनिकों को हवाई रास्ते से कठिन इलाकों में पहुंचना हो।
गोलियों, विस्फोट और धुएं के बीच काम करने की तैयारी
सेना के कॉम्बैट डॉग्स को युद्ध जैसे माहौल के लिए बेहद विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें विस्फोट, गोलीबारी, धुएं और अफरातफरी जैसी परिस्थितियों का अभ्यस्त बनाया जाता है, ताकि ऑपरेशन के दौरान वे घबराए बिना अपने काम को अंजाम दे सकें।
इनकी भूमिका केवल निगरानी और गश्त तक सीमित नहीं है। ये कुत्ते संदिग्धों को पकड़ने, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, प्रतिबंधित सामान का पता लगाने, वीआईपी सुरक्षा तथा खोज एवं बचाव अभियानों में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। भारतीय सैन्य कुत्ते विदेशों में भी अभियानों के दौरान सेवाएं दे चुके हैं।
मुश्किल इलाकों में सैनिकों के लिए बनते हैं मददगार
सैन्य अभियानों में कॉम्बैट डॉग्स को ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ माना जाता है। उनकी सूंघने और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता उन्हें कई अभियानों में उपयोगी बनाती है। वे ऐसी जगहों तक भी पहुंच सकते हैं, जहां इंसानों के लिए जाना मुश्किल होता है।
कैमरों से लैस किए जाने पर ये कुत्ते ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण सामरिक जानकारी जुटाने में भी मदद कर सकते हैं। उनका छोटा आकार और तेज गति कुछ परिस्थितियों में उन्हें अपेक्षाकृत कठिन लक्ष्य बनाती है।
दुनिया के कई देशों की सेनाएं भी मिलिट्री डॉग्स को एयरबोर्न ऑपरेशंस के लिए प्रशिक्षित करती हैं। कुछ देशों में इनका इस्तेमाल विशेष बलों के साथ अभियानों में किया जाता है।
कई सैन्य कुत्तों ने ड्यूटी के दौरान दी जान
भारतीय सेना के कॉम्बैट डॉग्स ने कई सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। इनमें से कुछ कुत्ते ऑपरेशन के दौरान घायल हुए, जबकि कुछ ने ड्यूटी निभाते हुए अपनी जान गंवाई। बहादुरी के लिए कई सैन्य कुत्तों को सम्मान भी दिया गया है। सेवा के दौरान जान गंवाने वाले कुत्तों को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाती है।
अब बुलेटप्रूफ वेस्ट और स्मार्ट कॉलर से बढ़ेगी सुरक्षा
आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपदा राहत मिशनों में इस्तेमाल होने वाले कॉम्बैट डॉग्स की सुरक्षा के लिए सेना नए उपकरणों पर भी काम कर रही है। इनमें हल्की मॉड्यूलर बुलेटप्रूफ वेस्ट और स्मार्ट कॉलर शामिल हैं।
ऑपरेशन के दौरान इन कुत्तों को अत्यधिक गर्मी या ठंड, लंबे समय तक शारीरिक मेहनत और जहरीले वातावरण जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे हीट स्ट्रेस, थकान, सांस संबंधी परेशानी और हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा रहता है।
स्मार्ट कॉलर में मिलेंगे शरीर के अहम आंकड़े
स्मार्ट कॉलर की मदद से ऑपरेशन के दौरान कुत्ते के शरीर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों पर नजर रखी जा सकेगी। इनमें शरीर का तापमान, नाड़ी, सांस लेने की दर, हार्ट-रेट वैरिएबिलिटी और कैलोरी खर्च जैसी जानकारियां शामिल हैं।
गोलियों और छर्रों से सुरक्षा देगी हल्की वेस्ट
सेना की ओर से विकसित की जा रही हल्की और मॉड्यूलर बुलेटप्रूफ वेस्ट कॉम्बैट डॉग्स के धड़ को गोलियों और छर्रों से सुरक्षा देने के लिए तैयार की जा रही है। इसका इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों और लाइन ऑफ कंट्रोल जैसे संवेदनशील इलाकों में गश्त के दौरान किया जा सकेगा।
पैराशूट जंप की ट्रेनिंग से लेकर स्मार्ट कॉलर और बुलेटप्रूफ वेस्ट तक, भारतीय सेना अपने कॉम्बैट डॉग्स को जमीन के साथ-साथ हवाई अभियानों के लिए भी अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
