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लखनऊ में स्कूली बच्चों को उद्यमी बनाने की पहल, बीबीएयू ने नवाचार और स्टार्टअप के गुर सिखाए

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) ने स्कूली विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की है। विश्वविद्यालय की ओर से गोद लिए गए पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, पिपरसंड में विद्यार्थियों के लिए उद्यमिता और नवाचार से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। 23 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को नए विचार विकसित करने, समस्याओं के समाधान खोजने और अपने नवाचारी विचारों को व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रोत्साहित करना था।

विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल और सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप के तत्वावधान में डेवलपिंग इनोवेशन कल्चर एंड एंटरप्रेन्योरशिप (DICE) कार्यक्रम के तहत यह पहल संचालित की गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को उद्यमिता की बुनियादी समझ देने के साथ नए विचारों को विकसित करने, उन्हें आगे बढ़ाने और स्टार्टअप की संभावनाओं से परिचित कराने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल, बीबीएयू के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, प्रो. सुफिया अहमद, नवकल्पना की इन्क्यूबेटर मैनेजर डॉ. मधुलिका, विद्यालय की प्रधानाचार्या सुमन कटियार और शिक्षक मौजूद रहे।

बच्चों के नए विचारों को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर

प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और नवाचार की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों में नए विचार उत्पन्न करने और समस्याओं का अलग तरीके से समाधान खोजने की पर्याप्त क्षमता होती है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे सामने लाने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने बताया कि भविष्य में विद्यालय के विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से जुड़े अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रस्तुत विचारों का मूल्यांकन कर उपयोगी और उत्कृष्ट विचारों का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित विद्यार्थियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर दिलाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

प्रो. अरोड़ा के अनुसार, इस तरह की गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने, समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने और वैज्ञानिक सोच को मजबूत बनाने में सहायक होंगी। इससे विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविक स्वरूप देने और भविष्य में देश के विकास में योगदान करने की प्रेरणा भी मिलेगी।

पेटेंट और कॉपीराइट की भी दी गई जानकारी

कार्यक्रम में प्रो. सुफिया अहमद ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी नए आविष्कार, विचार या रचनात्मक कार्य को उचित कानूनी संरक्षण देने में बौद्धिक संपदा अधिकारों की अहम भूमिका होती है।

उन्होंने पेटेंट और कॉपीराइट के बीच अंतर समझाते हुए बताया कि पेटेंट नए आविष्कारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है, जबकि कॉपीराइट साहित्यिक, कलात्मक और अन्य रचनात्मक कार्यों से जुड़े अधिकारों की रक्षा करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे नए विचार विकसित करने के साथ-साथ अपनी रचनाओं और नवाचारों के अधिकारों के प्रति भी जागरूक रहें।

इस सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि नवाचार केवल नया विचार सोचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित रखने और उसके अधिकारों को समझने की जानकारी भी जरूरी है।

स्टार्टअप शुरू करने और पंजीकरण की प्रक्रिया समझाई

नवकल्पना की इन्क्यूबेटर मैनेजर डॉ. मधुलिका ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप की अवधारणा, उसकी स्थापना और पंजीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी नवाचारी विचार को सफल उद्यम में बदलने के लिए उचित योजना, जरूरी दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रियाओं की समझ होना आवश्यक है।

उन्होंने स्टार्टअप के पंजीकरण से जुड़ी औपचारिकताओं और उद्यम स्थापित करने के विभिन्न चरणों के बारे में भी बताया। इस दौरान विद्यार्थियों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि नए विचारों को व्यवस्थित योजना के साथ आगे बढ़ाकर उद्यमिता की दिशा में कदम रखा जा सकता है।

प्रोटोटाइप से बिजनेस मॉडल तक सीखेंगे विद्यार्थी

DICE कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के लिए उद्यमिता कौशल विकास, नए विचारों के सृजन के लिए क्षेत्रीय भ्रमण और प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट तैयार करने जैसी गतिविधियां शामिल की गईं। इसके साथ ही प्रोटोटाइप विकसित करने, बिजनेस मॉडल तैयार करने, स्टार्टअप को सहायता देने वाली व्यवस्थाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित सत्र भी आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा विकसित प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट को प्रदर्शित करने के लिए डेमो डे आयोजित करने और पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से स्कूल इनोवेशन प्रतियोगिता में विचार प्रस्तुत करने जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया। इन प्रयासों का मकसद विद्यार्थियों को अपने विचारों की उपयोगिता समझने, उन्हें शुरुआती स्वरूप देने और संभावित समाधान विकसित करने का अवसर उपलब्ध कराना है।

विश्वविद्यालय की यह पहल स्कूली स्तर पर नवाचार की संस्कृति विकसित करने के साथ विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, उद्यमिता और स्टार्टअप से जुड़े अवसरों की जानकारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए बच्चों को भविष्य में केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रहने के बजाय नए विचारों के आधार पर उद्यम विकसित करने की संभावनाओं से भी परिचित कराया जा रहा है।

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