बीबीएयू में कैंसर मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम, सर्वाइकल कैंसर से बचाव और HPV वैक्सीनेशन पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कैंसर मुक्त भारत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय और स्त्री वेलफेयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रोजेक्ट आनंदी के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और एचपीवी वैक्सीनेशन के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अपोलो हॉस्पिटल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिमेष अग्रवाल शामिल हुए।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम में संयोजक एवं डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रोजेक्ट आनंदी की संस्थापक डॉ. सुमेधा नीलू द्विवेदी, सिटी हॉस्पिटल लखनऊ की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना मेहता, डॉ. सुधा बाजपेयी और प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय मंच पर मौजूद रहे। आयोजन की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया। आयोजन समिति ने अतिथियों और शिक्षकों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। प्रो. एस. विक्टर बाबू ने सभी का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी।
एचपीवी संक्रमण से जुड़े हैं सर्वाइकल कैंसर के लगभग सभी मामले: कुलपति
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है और इसके लगभग सभी मामले ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के लगातार संक्रमण से जुड़े होते हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण, नियमित जांच और समय पर चिकित्सकीय परामर्श बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी टेस्ट के जरिए गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले शुरुआती असामान्य बदलावों की पहचान की जा सकती है। कुलपति ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर को लेकर समाज में मौजूद झिझक और जागरूकता की कमी को दूर करना जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाने के साथ बीमारी की रोकथाम, समय पर जांच और उचित उपचार के महत्व को समझने में मदद करते हैं।
समय पर जांच और टीकाकरण से संभव है बचाव: प्रो. विक्टर बाबू
कार्यक्रम संयोजक प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर समाज तक सही जानकारी पहुंचाना और लोगों को जागरूक करना है। सर्वाइकल कैंसर गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन समय पर जांच, एचपीवी वैक्सीनेशन और उचित उपचार से इसकी रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन संभव है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों और समाज के बीच स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को लगातार प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज न करें महिलाएं
सिटी हॉस्पिटल लखनऊ की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना मेहता ने सर्वाइकल कैंसर के चिकित्सकीय और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा में विकसित होता है और इसका प्रमुख कारण एचपीवी का लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण है। उन्होंने बीमारी के शुरुआती और गंभीर लक्षणों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वाइकल कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है। समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने एचपीवी वैक्सीनेशन, नियमित जांच, पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट की उपयोगिता बताई। साथ ही कहा कि बीमारी की अवस्था के अनुसार सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे उपचार के विकल्प उपलब्ध हैं। उन्होंने महिलाओं से बिना संकोच चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।

गार्डासिल और सर्वावैक टीके एचपीवी संक्रमण से बचाव में सहायक
अपोलो हॉस्पिटल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिमेष अग्रवाल ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एचपीवी वैक्सीनेशन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव के लिए गार्डासिल और सर्वावैक जैसे टीके उपलब्ध हैं। ये टीके सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार प्रमुख एचपीवी प्रकारों से सुरक्षा देने में सहायक हैं।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में एचपीवी संक्रमण के संपर्क में आने से पहले टीकाकरण कराना अधिक प्रभावी माना जाता है। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग भी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एचपीवी वैक्सीन बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन यह नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है।
महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहा प्रोजेक्ट आनंदी
प्रोजेक्ट आनंदी की संस्थापक डॉ. सुमेधा नीलू द्विवेदी ने परियोजना की अवधारणा और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और विशेष रूप से मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही इन विषयों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और झिझक को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करने, सही जानकारी हासिल करने और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। इस दिशा में सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता कार्यक्रमों की अहम भूमिका है।
स्वास्थ्य जागरूकता को व्यवहार में शामिल करना जरूरी: डॉ. सुधा बाजपेयी
डॉ. सुधा बाजपेयी ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाना आवश्यक है। सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर चर्चा करना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी से स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
पौधे और शॉल भेंट कर अतिथियों का जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों और शिक्षकों को पौधे एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान प्रो. संगीता सक्सेना, प्रो. शिखा, प्रो. एम.एल. मीणा, डॉ. रवि शंकर वर्मा, डॉ. लता बाजपेयी सिंह, डॉ. जी. सुनील बाबू सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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