बीबीएयू में स्वास्थ्य शासन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, विकसित भारत-2047 के लिए समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था पर मंथन
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में 29 अक्टूबर को स्वास्थ्य शासन के भविष्य और सभी के लिए समान स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। लोक प्रशासन विभाग की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी का विषय ‘विकसित भारत @2047 के लिए स्वास्थ्य शासन की पुनर्कल्पना: सभी के लिए समावेशी, सुदृढ़ एवं समानतापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में’ रखा गया है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ, किफायती और जवाबदेह बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। आयोजन समग्र चिंतन, अवध प्रांत, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जनरल मैनेजर डॉ. मिलिंद वर्धन उपस्थित रहे। मंच पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति प्रो. ए.एस. मलिक, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर और डॉ. राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, अयोध्या के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. टी.पी. सिंह, बीबीएयू के आंबेडकर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की संकायाध्यक्ष प्रो. शूरा दारापुरी, लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. ओ.पी.बी. शुक्ला और कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत हुआ। आयोजन समिति ने अतिथियों और शिक्षकों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। प्रो. शूरा दारापुरी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने संगोष्ठी के उद्देश्य और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है, लेकिन बदलती सामाजिक जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी को भी शामिल करना होगा। उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और न्यायसंगत सुविधाएं मिलें। इसके साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
प्रो. मित्तल ने भारतीय चिकित्सा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान बेहद समृद्ध और प्राचीन है। महर्षि पतंजलि ने योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्व बताया, जबकि आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत ने क्रमशः चरक संहिता और सुश्रुत संहिता के जरिए चिकित्सा विज्ञान तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इस विरासत को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि हर नागरिक को सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश जरूरी: डॉ. मिलिंद वर्धन
मुख्य अतिथि डॉ. मिलिंद वर्धन ने कहा कि देश में निवेश को केवल आर्थिक लाभ के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश भी देश के भविष्य और मानव संसाधन के विकास के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही पर चिंता जताते हुए कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधाएं, बेहतर पोषण और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने के कारण कई अनमोल जीवन खो जाते हैं।
उन्होंने जन्म दर और मृत्यु दर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार तथा मृत्यु दर कम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पर्याप्त निवेश के साथ जनजागरूकता और विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
सरकारी और निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग पर जोर
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के पूर्व कुलपति प्रो. ए.एस. मलिक ने कहा कि 21वीं सदी के दूसरे दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनसे निपटने के लिए समावेशी और प्रभावी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल और समानता जरूरी है।
प्रो. मलिक ने सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी मानने के बजाय सहयोगी के रूप में काम करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, दोनों क्षेत्रों के संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करके स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है।

भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बने विकास का मॉडल: प्रो. मनोज दीक्षित
प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि किसी भी देश के विकास के लिए समाज की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करना जरूरी है। भारत को अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास के सूचकांक तथा नीतियां तैयार करनी चाहिए।
उन्होंने पश्चिमी और भारतीय विकास अवधारणाओं के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पश्चिमी दृष्टिकोण में व्यक्तिगत प्रगति और उपलब्धियों को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि भारतीय विचारधारा सामूहिक कल्याण, सामाजिक समरसता और समग्र विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा में भारतीय ज्ञान परंपरा, सामाजिक जरूरतों और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
स्वास्थ्य नीतियों का आकलन सामाजिक प्रभावों से हो: प्रो. टी.पी. सिंह
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. टी.पी. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी नीतियों का मूल्यांकन केवल आंकड़ों और आर्थिक प्रगति के आधार पर नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि इन नीतियों का समाज पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ रहा है और वे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतें कितनी पूरी कर पा रही हैं।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पोषण और सामाजिक जागरूकता के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि भारत को स्थानीय परिस्थितियों, जनसंख्या की जरूरतों और सामाजिक विविधताओं के अनुरूप विकास मॉडल अपनाना चाहिए। इसमें तकनीकी नवाचार के साथ मानवीय संवेदनशीलता और समान अवसरों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
संगोष्ठी के दौरान आयोजन समिति की ओर से स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और शिक्षकों को स्मृति चिह्न तथा शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रतिभागियों के लिए तीन तकनीकी सत्रों और एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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