Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता में संवेदनशीलता व विश्वसनीयता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी: अतुल वीएन चतुर्वेदी

देहरादून: लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 के दूसरे दिन 26 अक्टूबर को ’21वीं सदी में सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता का स्वरूप’ विषय पर महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की गई। ‘प्रकृति की पाठशाला’ में हुए इस सत्र की अध्यक्षता इटावा टाइम्स के संपादक अतुल वीएन चतुर्वेदी ने की। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने बदलते दौर में सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता की भूमिका, चुनौतियों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।

सत्र में अतुल वीएन चतुर्वेदी ने कहा कि सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता तीनों ही समाज को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन क्षेत्रों से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशीलता और विश्वसनीयता बनाए रखें। चर्चा में वक्ताओं ने इन माध्यमों के बदलते स्वरूप और उनके प्रभावों पर भी विचार साझा किए।

प्रख्यात साहित्यकार और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम लेखक गाँव के पांच दिवसीय वार्षिकोत्सव में देश-विदेश के साहित्यकारों की भागीदारी रही। महोत्सव के विभिन्न सत्रों में कला, संस्कृति, पत्रकारिता, सिनेमा और अध्यात्म जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार पंकज शर्मा ने कहा कि आज पत्रकारिता के कई स्वरूप सामने आ गए हैं और अलग-अलग मंचों पर खबरें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सनसनी फैलाने वाली खबरें और भ्रामक सूचनाएं समाज में भ्रम पैदा करती हैं। इससे बचना सभी की जिम्मेदारी है।

दिल्ली से आए डॉ. जितेंद्र चौधरी ने डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर विचार रखते हुए कहा कि इनके आने से समाचारों और पत्रकारिता तक पहुंच आसान हुई है। हालांकि, इस दौरान सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

कई वरिष्ठ पत्रकारों और साहित्यकारों ने रखे विचार

इस सत्र में वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजेंद्र शर्मा, डॉ. रितेश चौधरी (मेरठ), पंकज शर्मा, अनिरुद्ध कुमार ‘सुधांश’, डॉ. राजेंद्र राजन (हिमाचल), अतुल वीएन चतुर्वेदी, डॉ. अशोक गिरी (हरिद्वार), जयप्रकाश पंवार और डॉ. जितेंद्र चौधरी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन दिल्ली के कवि एवं मंच संचालक डॉ. विवेक गौतम ने किया, जबकि सत्र के संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. दर्शिनी प्रिया ने निभाई। पंडाल प्रभारी के रूप में पूजा पांडेय और हिमांशु ने अपनी सेवाएं दीं। आयोजन में साहित्य प्रेमियों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।

---------------------------------------------------------------------------------------------------   https://www.youtube.com/watch?si=RtToJsBhYBatUrym&v=mOuYNSdhjHA&feature=youtu.be