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अनोखा जीव: कड़कड़ाती ठंड में भूल जाता है सबकुछ, गर्मी आते ही वापस आ जाती है याददाश्त

दुनिया में प्रकृति के कई ऐसे रहस्य हैं जो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक अनोखा जीव है, जो सर्दियों में लगभग सब कुछ भूल जाता है, लेकिन जैसे ही मौसम बदलता है, उसकी याददाश्त फिर से लौट आती है। यह सुनने में किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है।

इस अद्भुत जीव का नाम आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल है। छोटे कद का यह जीव बेहद ठंडे इलाकों में पाया जाता है और इसकी खासियत ने वैज्ञानिकों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।

अलास्का और साइबेरिया की कड़ाके की ठंड में रहता है

यह छोटा जीव मुख्य रूप से अलास्का और साइबेरिया जैसे बेहद ठंडे क्षेत्रों में पाया जाता है। इन इलाकों में जब तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है, तब यह जीव करीब 8 महीनों के लिए गहरी नींद में चला जाता है। इस अवस्था को हाइबरनेशन कहा जाता है।

हाइबरनेशन के दौरान इसका शरीर इतना ठंडा हो जाता है कि इसका खून लगभग जमने की स्थिति में पहुंच जाता है। इस दौरान शरीर की गतिविधियां बेहद धीमी हो जाती हैं और यह लगभग निष्क्रिय अवस्था में रहता है।

ठंड में लगभग ‘बंद’ हो जाता है दिमाग

सर्दियों के दौरान ठंड के प्रभाव से इसके दिमाग की कोशिकाओं के बीच बने कनेक्शन टूट जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दौरान इसका मस्तिष्क लगभग बंद हो जाता है और यह जीव अपनी ज्यादातर यादें खो देता है।

इतना ही नहीं, इसकी दिल की धड़कन भी बेहद धीमी हो जाती है। सामान्य परिस्थितियों में जहां दिल लगभग 200 बार प्रति मिनट धड़कता है, वहीं हाइबरनेशन के दौरान यह घटकर सिर्फ 1 से 5 धड़कन प्रति मिनट तक रह जाती है।

वसंत आते ही लौट आती है याददाश्त

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जैसे ही वसंत का मौसम आता है, यह जीव अपनी गहरी नींद से जाग उठता है। जागने के करीब दो घंटे के भीतर ही इसके दिमाग के टूटे हुए कनेक्शन फिर से जुड़ने लगते हैं।

इसके बाद यह फिर से अपनी पुरानी यादें हासिल कर लेता है। उदाहरण के तौर पर उसे यह याद आ जाता है कि उसने खाना कहां छिपाया था या उसका साथी कौन है।

वैज्ञानिकों के लिए शोध का बड़ा विषय

आश्चर्य की बात यह भी है कि इंसानों में अगर दिमाग को इतनी कम ऑक्सीजन मिले तो वह ब्रेन डेड हो सकता है, लेकिन यह जीव पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

इसी वजह से वैज्ञानिक इस जीव पर गहराई से शोध कर रहे हैं। अगर यह समझ आ जाए कि यह जीव अपने दिमाग के कनेक्शन को कैसे दोबारा जोड़ लेता है, तो भविष्य में अल्जाइमर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

 

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