Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

अनिल अग्रवाल ने वैश्विक ऊर्जा कंपनियों से भारत में निवेश करने का किया आह्वान

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने वैश्विक ऊर्जा कंपनियों से भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण, विवादों का समाधान और दीर्घकालिक परिचालन संबंधी निश्चितता निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

लंदन में आयोजित इंडिया एनर्जी बिड प्रमोशन रोडशो में भाग लेने के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में अग्रवाल ने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि पहली बार सरकार लंबी मंजूरी प्रक्रियाओं के बजाय स्व-प्रमाणन (Self-Certification) के लिए तैयार है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार सभी कानूनी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की इच्छुक है। इससे निवेशकों को भरोसा मिलेगा और उत्पादन बढ़ाने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने अब किसी भी फील्ड की पूरी अवधि के लिए लीज देने की भी अनुमति दे दी है। जैसा कि मैं हमेशा कहता हूं, सबसे महत्वपूर्ण है भरोसा, और अब यह नीतियों में भी दिखाई दे रहा है।”

इन सुधारों का असर तेल एवं गैस क्षेत्र में अन्वेषण से लेकर पहले से उत्पादन कर रहे क्षेत्रों तक देखने को मिल सकता है। परिचालन अवधि को लेकर अधिक स्पष्टता से अतिरिक्त ड्रिलिंग, नई तकनीकों के इस्तेमाल और संसाधनों की बेहतर रिकवरी को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, सरल प्रक्रियाएं परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और परिसंपत्तियों के पूरे जीवनकाल में निवेश की व्यावसायिक संभावनाओं को मजबूत करने में मदद करेंगी।

समुद्री क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम, जिसे वित्त वर्ष 2030-31 तक के लिए मंजूरी दी गई है, भूकंपीय डेटा संग्रह (Seismic Data Acquisition), गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषणात्मक ड्रिलिंग, साझा अपतटीय बुनियादी ढांचे तथा घरेलू विनिर्माण एवं सेवा क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है। यह कार्यक्रम अन्वेषण के साथ-साथ नई खोजों के विकास के लिए आवश्यक संपूर्ण इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।

अग्रवाल ने कहा, “जैसे-जैसे भारत में लाभ कमाने की अपार संभावनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ेगी, बड़ी कंपनियां निश्चित रूप से तेल एवं गैस ब्लॉक्स की नीलामी में भाग लेंगी। वे स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं, विशेष रूप से समुद्र मंथन कार्यक्रम के तहत।”

--------------------------------------------------------------------------------------------------- https://www.youtube.com/watch?si=RtToJsBhYBatUrym&v=mOuYNSdhjHA&feature=youtu.be