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महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि

बरेली,10 मई।महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय (MJPRU), बरेली को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) एवं प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) योजना के तहत देशभर के राज्य विश्वविद्यालयों में तकनीकी नवाचार, उद्योगोन्मुख कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति एवं उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने हेतु एक राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत देश के लगभग 80 राज्य विश्वविद्यालयों में से केवल 26 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का चयन किया गया है। कुलपति प्रो. के. पी. सिंह की अथक पहल, दूरदर्शिता एवं सार्थक प्रयासों से महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय का इन चुनिंदा संस्थानों में चयन होना विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव एवं उपलब्धि का विषय है।
वित्तीय सहायता एवं तकनीकी संसाधन :-

इन कार्यक्रमों के सफल संचालन हेतु PM-USHA योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय को महत्वपूर्ण वित्तीय अनुदान एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। इस अनुदान का उपयोग विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, प्रयोगात्मक अधिगम (Experiential Learning), स्टार्टअप विकास एवं उन्नत अनुसंधान सुविधाएँ उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इस संपूर्ण पहल से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त होगा।

कार्यक्रमों का क्रियान्वयन एवं समन्वयन:-

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन कार्यक्रमों के सुचारू एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रो. एस. एस. बेदी को नोडल अधिकारी, NEP Initiative under PM-USHA नियुक्त किया है। उनके निर्देशन में सभी तकनीकी एवं कौशल विकास कार्यक्रमों का समन्वय किया जाएगा। सभी कार्यक्रम कुलपति प्रो. के. पी. सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं संरक्षण में संचालित किए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय में संचालित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के समन्वयकों की जिम्मेदारी निम्नवत निर्धारित की गई है:-
1. इलेक्ट्रॉनिक किट इनिशिएटिव वर्कशाप

समन्वयक: प्रो. मनीष राय

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक किट्स, एम्बेडेड सिस्टम, सेंसर इंटरफेसिंग, माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्रामिंग (Arduino, IoT आधारित मॉड्यूल) एवं हार्डवेयर प्रोटोटाइपिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ:-

· PCB डिजाइन एवं रियल-टाइम इलेक्ट्रॉनिक सर्किट निर्माण
· Hands-on Learning एवं Product Development Skills
· इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, ऑटोमेशन एवं स्मार्ट डिवाइस डेवलपमेंट में रोजगार के अवसर
· स्टार्टअप स्थापना हेतु तकनीकी आधार

2. स्टार्टअप इन्क्यूबेटर एवं फ्यूचरिस्टिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना

समन्वयक: प्रो. यतेंद्र कुमार

इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय में एक सशक्त Innovation Ecosystem विकसित करना है। विश्वविद्यालय परिसर में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर, उद्यमिता विकास मंच एवं भविष्योन्मुख कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

मुख्य विशेषताएँ:

· Design Thinking, Product Innovation, Business Model Development
· Intellectual Property Rights (IPR), Startup Funding एवं Entrepreneurship Management
· विद्यार्थियों को Job Seekers से Job Creators बनाने हेतु प्रेरणा
· आत्मनिर्भर एवं नवाचार-आधारित उद्यम स्थापना में सक्षमता

3. एसएमटी (सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी) असेंबली लाइन कार्यक्रम

समन्वयक: प्रो. राजेश मौर्य

SMT Assembly Line आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण उद्योग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में एसएमटी असेंबली लाइन स्थापित की जाएगी।

मुख्य विशेषताएँ:

· PCB Fabrication, Automated Component Mounting, Soldering Technology
· Quality Testing एवं Electronic Manufacturing Processes का प्रशिक्षण
· Electronics Manufacturing Services (EMS), Semiconductor एवं Consumer Electronics Industry में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ
· अत्याधुनिक मशीनों एवं उत्पादन प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी

4. एजेंटिक एआई हैकाथॉन एवं उन्नत कार्यशाला

समन्वयक: डॉ. ब्रजेश कुमार

Artificial Intelligence के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगा। हैकाथॉन एवं कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थी वास्तविक जीवन की चुनौतियों पर AI-आधारित समाधान विकसित करेंगे।

मुख्य विशेषताएँ:

· Agentic AI, Autonomous Systems, Machine Learning, Generative AI
· Intelligent Decision Systems एवं Computational Intelligence
· समस्या-समाधान क्षमता (Problem Solving Ability), Coding Skills एवं Research Aptitude का विकास
· भविष्य की AI-आधारित तकनीकी दुनिया में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

5. सेमीकंडक्टर स्किलिंग कार्यक्रम

समन्वयक: डॉ. इंद्रप्रति कौर

भारत सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर मिशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के चयनित विद्यार्थियों को उन्नत प्रशिक्षण हेतु आईआईटी मद्रास भेजा जाएगा।

मुख्य विशेषताएँ:

· VLSI Design, Chip Fabrication Process, Semiconductor Devices, Nanoelectronics
· Integrated Circuit Technology का व्यावहारिक एवं शोध-आधारित प्रशिक्षण
· भारत के उभरते सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में उच्च स्तरीय रोजगार के अवसर
· “Make in India” एवं “Digital India” जैसी राष्ट्रीय पहलों को सशक्त बनाने में योगदान

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. के. पी. सिंह ने कहा:

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखकर, उन्हें उद्योगोन्मुख, तकनीकी रूप से दक्ष एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना है। ये कार्यक्रम विद्यार्थियों को Artificial Intelligence, Semiconductor Technology, Electronics Manufacturing, Startup Innovation एवं Advanced Skill Development जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक दक्षता प्रदान करेंगे।”

“एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय का देश के चुनिंदा 26 संस्थानों में चयन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं नवाचार क्षमता का प्रमाण है। यह पहल विद्यार्थियों को ‘Lab to Industry’ मॉडल से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनाएगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठाकर राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया है कि इन समस्त कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी दक्षता, अनुसंधान क्षमता, नवाचार दृष्टिकोण एवं उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त होगा। यह पहल विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप विकास एवं कौशल-आधारित अधिगम के क्षेत्र में एक नई पहचान प्रदान करेगी।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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