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रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम “नवोत्सव” का आयोजन

बरेली, 06 दिसम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के बहुभाषा अध्ययन केंद द्वारा नव-प्रवेशित छात्रों के लिए वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “नवोत्सव” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभाग में अध्ययनरत विभिन्न भाषाओं के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना था ताकि वे एक-दूसरे से परिचित हों, अपने अनुभव बाँटें, और उनमें पारस्परिक सहयोग तथा सहभागिता की भावना विकसित हो सके।
कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर छात्रों ने विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को दर्शाते हुए रंगोलियाँ बना कर विभाग को सज्जित किया। कार्यक्रम का औपचारिक प्रारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं बहुभाषिक केंद्र की समन्वयक डॉ. अनीता त्यागी ने की। उन्होंने सभी का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में कहा कि “भाषाएँ केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे व्यक्तित्व, हमारी संवेदना और हमारी पहचान का विस्तार हैं। नवोत्सव का उद्देश्य यही है कि विद्यार्थी विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को एक साथ जी सकें और सीख सकें।”
इस अवसर पर बहुभाषिक केंद्र की डीन प्रो. सुमित्रा कुकरेती, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री हरीश चंद्र, और वित्त अधिकारी श्री विनोद कुमार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. सुमित्रा कुकरेती ने मंच को संबोधित करते हुए कहा कि “विद्यार्थी तब ही आगे बढ़ते हैं जब वे भाषा, संस्कृति और अध्ययन को साथ लेकर चलते हैं। बहुभाषिक केंद्र का उद्देश्य ही है कि आप सब बहुभाषिक जगत की अनंत संभावनाओं को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ दुनिया में कदम रखें।”
रजिस्ट्रार श्री हरीश चंद ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा कि “विश्वविद्यालय उन विद्यार्थियों का है जो सीखने की इच्छा रखते हैं। अवसर हर किसी को मिलता है, लेकिन उसका सही उपयोग वही कर पाता है जो अनुशासन और उत्साह से आगे बढ़ता है।”
वित्त अधिकारी श्री विनोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “प्रशासन और शिक्षण तब सार्थक होते हैं जब विद्यार्थी अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर कुछ नया सीखने का साहस दिखाते हैं। नवोत्सव उसी भावना का उत्सव है।”
इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी संकाय की डीन प्रो. अर्चना गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “विभिन्न भाषाओं का ज्ञान आज के तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होता जा रहा है। विद्यार्थी जब भाषा और तकनीक दोनों के साथ स्वयं को विकसित करते हैं, तो उनके लिए अवसरों का दायरा और अधिक विस्तृत हो जाता है।” फार्मेसी संकाय की डीन प्रो. शोभना ने अपने संबोधन में कहा कि “स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में स्पष्ट और प्रभावी संवाद की आवश्यकता होती है। ऐसे में विभिन्न भाषाओं की समझ छात्रों को बेहतर ढंग से कार्य करने में सहायता देती है। इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों को आपस में जुड़ने और सीखने का अच्छा अवसर प्रदान करते हैं।”

इसके बाद विभाग में उपस्थित विभिन्न भाषा-विशेषज्ञों ने छात्रों को दिशानिर्देश और प्रेरणा दी। जर्मन भाषा विशेषज्ञ डॉ० रजनीश गुप्ता ने मंच से कहा कि “भाषा कोई बोझ नहीं, अवसर है और जर्मन भाषा आपके सामने उद्योग, विज्ञान और शोध की नई राहें खोल सकती है।” फ्रेंच विशेषज्ञ डॉ० पियूष चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि “फ्रेंच सीखना केवल भाषा सीखना नहीं, बल्कि दुनिया को एक नए नजरिए से देखना है।” स्पैनिश विशेषज्ञ आशिष गौतम ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि “स्पैनिश सीखने से आप उन देशों से जुड़ते हैं जहाँ संस्कृति और मानवीय संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह भाषा आपके करियर में भी कई दरवाज़े खोल सकती है।”
अंग्रेज़ी भाषा के विशेषज्ञ शैशव मोहन ने कहा कि “अंग्रेज़ी आज भी वैश्विक संवाद का सबसे मजबूत साधन है, लेकिन इसे सहजता से तभी सीखा जा सकता है जब आप इसे दैनिक जीवन में जगह दें।”
भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी विशेषज्ञ कृष्ण केतन ने मंच पर कहा कि “हिंदी अब केवल साहित्य की भाषा नहीं रही, बल्कि तकनीक, प्रशासन, मीडिया, विज्ञान और व्यापार हर क्षेत्र में इसका दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि आप अपनी भाषा को अपनाएँगे, तो दुनिया स्वयं आपकी पहचान को स्वीकार करेगी।”
कार्यक्रम के बीच में ताइवान से आयी मंदारिन भाषा विशेषज्ञ चिया-ली चेन ने रोचक खेलों का आयोजन किया जिनमें विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत और हास्य-रस से भर दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “सीखना तभी आसान होता है जब उसमें सहजता हो, और खेलों की सहजता भाषा सीखने के अनुभव को और अधिक प्रभावी बना देती हैं।”
बहुभाषिक केंद्र के छात्रों ने जर्मन, फ्रेंच, मंदारिन, स्पैनिश और हिन्दी भाषा में अनेक रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। छात्रों ने नृत्य, संगीत, काव्य-पाठ आदि से कार्यक्रम को ऊर्जावान बना दिया। फ्रेंच भाषा की छात्रा दीक्षा और सफीया ने कविता-पाठ किया, नाइजीरिया से आए जर्मन भाषा के छात्र बशीर ने हिंदी गीत प्रस्तुत किया। मंदारिन भाषा के विद्यार्थियों मोहिनी, स्वाती, मो. अली, उत्पल ने मंदारिन भाषा में गाना प्रस्तुत किया और सिद्धार्थ, अमन और मिस चिया ली ने उकेलिल से एक गीत प्रस्तुत किया। मोहिनी और स्वाती ने नृत्य प्रस्तुत किया। हिंदी भाषा की आरती आर्या ने हिन्दी कविता-पाठ किया। फ्रेंच भाषा की श्रेष्ठा और जर्मन भाषा के अंकित ने मंच का संचालन किया।
इसके अतिरिक्त विभाग के शिक्षकों डॉ. अनीता त्यागी, डॉ० रजनीश गुप्ता, डॉ. पियूष चौबे, कृष्ण केतन, डॉ० सिंशुपा, डॉ० राहुल कुमार, डॉ० राका सक्सेना और शैशव मोहन ने भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न भाषाओं और विधाओं को अभिव्यक्त किया। दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियों के साथ सभी का मनोबल बढ़ाया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ० अनीता त्यागी ने आयोजित खेलों के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये और सभी उपस्थित अतिथियों, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को धन्यवाद व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आधिकारिक समापन की घोषणा की। कार्यक्रम के अंत में जलपान का आयोजन किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम आनंद, संस्कृति, भाषा और सहभागिता से भरपूर रहा। विभाग के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने आयोजन की तैयारियों और संचालन में सक्रिय सहभागिता निभाई ।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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