आरजीआईपीटी में “एनर्जिया 2025” के समापन के साथ “सौहार्द्य” एवं “उर्जोत्सव” का शुभारम्भ

जायस: राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी), जायस में ऊर्जा संगम 2025 के अंतर्गत आयोजित क्रीड़ा प्रतियोगिता एनर्जिया 2025 का 11 नवम्बर 2025 की सायं धूमधाम से समापन और पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम संस्थान के खेल परिषद द्वारा आयोजित किया गया था। विभिन्न खेलों के विजेता खिलाड़ियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजीव गोदारा, अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज, भारतीय मुक्केबाज टीम के मुख्य कोच एवं दो बार के विश्व चैंपियन तथा विशिष्ट अतिथि श्री हर्ष गिल, WBC एशियाई खिताब विजेता उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को खेल भावना, अनुशासन और टीम वर्क के महत्व पर प्रेरक संदेश दिए। ।
साथ ही आज 12 नवम्बर 2025 को “सौहार्द्य” एवं “उर्जोत्सव” के उद्घाटन समारोह का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. सौमित्र सनाढ्य, विशिष्ट अतिथि श्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, संस्थान के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी, छात्र मामले के डीन डॉ. देबाशीष पांडा, संकाय संयोजक डॉ. शैलेश कुमार, डॉ. करन मलिक, डॉ. अरविंद सिंह सहित संस्थान के सम्मानित संकाय सदस्य, कर्मचारीगण और विभिन्न सहभागी संस्थानों के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। उर्जोत्सव कार्यक्रम के अन्तर्गत अमेठी एवं रायबरेली जिले के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी विज्ञान प्रदर्शनी लगायी।
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। अतिथियों ने विद्यार्थियों को ज्ञान, करुणा, नवाचार और सहयोग के महत्व पर प्रेरित किया। यह आयोजन न केवल खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का उत्सव था, बल्कि विद्यार्थियों में समूह भावना, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी साबित हुआ।
डॉ. देबाशीष पांडा ने अपने संबोधन में कहा कि सच्ची बुद्धिमत्ता केवल ज्ञान अर्जन में नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति में निहित होती है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का मापदंड धन नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण पर डाला गया सकारात्मक प्रभाव होना चाहिए।



प्रो. हरीश हिरानी, निदेशक आरजीआईपीटी ने तकनीकी उन्नयन और स्वचालन की तीव्र गति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि प्रौद्योगिकी समाज की सेवा नहीं करती, तो वह अंततः स्वयं अपने भार तले ढह जाती है।
श्री प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने आरजीआईपीटी परिसर की सुंदरता और सकारात्मक ऊर्जा की सराहना की। उन्होंने अपने जीवन की यात्रा—केरल से अमेरिका तक—साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को कार्टून के माध्यम से समझाने का अभिनव तरीका विकसित किया।
मुख्य अतिथि प्रो. सौमित्र सनाढ्य ने प्रौद्योगिकी के द्विपक्षीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक का एक चेहरा मानवता को ऊपर उठाता है, जबकि उसका दुरुपयोग समाज के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने छात्रों को अपने रुचि क्षेत्रों में उत्साहपूर्वक कार्य करने और जिज्ञासा तथा रुचि को हमेशा बनाए रखने की प्रेरणा दी।
समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उद्घाटन ने न केवल दो उत्सवों की शुरुआत की, बल्कि आरजीआईपीटी में विचार, नवाचार, करुणा और सहयोग की भावना को भी प्रदर्शित किया।

