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ईरान युद्ध की फर्जी तस्वीरें दिखाकर ठगी कर रहे जालसाज, आईबी ने किया अलर्ट

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय की चेतावनी के बाद अब इंटेलिजेंस ब्यूरो ने एक बड़े फर्जीवाड़े को लेकर देश को सावधान किया है। कुछ शरारती तत्व ईरान में चल रहे युद्ध का फायदा उठाकर लोगों की भावनाओं से खेल रहे हैं। ये लोग युद्ध पीड़ितों की मदद के नाम पर अवैध रूप से चंदा इकट्ठा कर रहे हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि देश में कई ऐसे समूह सक्रिय हो गए हैं जो ईरान युद्ध के नाम पर पैसा मांग रहे हैं। ये तत्व लोगों को भरोसा दिलाते हैं कि यह पैसा ईरान के प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए है। पिछले साल इस्रायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध शुरू होने पर भी ऐसी ही गतिविधियां देखने को मिली थीं। ऐसी फर्जी संस्थाएं युद्ध के समय अचानक सामने आती हैं और भारी मात्रा में फंड जमा करके गायब हो जाती हैं।

आईबी के अधिकारी के अनुसार, ये ठग लोगों को भावुक करने के लिए युद्ध की डरावनी तस्वीरें दिखाते हैं। इनमें से ज्यादातर तस्वीरों के साथ डिजिटल तरीके से छेड़छाड़ की गई होती है। लोग इन तस्वीरों को देखकर भावुक हो जाते हैं और न केवल नकद पैसा, बल्कि सोना तक दान कर देते हैं।

जांच एजेंसियों ने पाया है कि इस घोटाले का सबसे ज्यादा असर जम्मू-कश्मीर में है। वहां कुछ लोग घर-घर जाकर चंदा मांग रहे हैं। वे लोगों को झूठी कहानियां सुनाते हैं और स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। वे लोगों की धार्मिक और भावनात्मक संवेदनशीलता का फायदा उठाकर उन्हें ठग रहे हैं। कश्मीर के अधिकारियों को पता चला है कि यह वही पुराना नेटवर्क है जो अनुच्छेद 370 हटने से पहले अलगाववादी समूहों के लिए पैसा जुटाता था।

ईरान युद्ध के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये वसूले जा चुके हैं। अकेले जम्मू-कश्मीर में यह घोटाला करीब 16 करोड़ रुपये का है। अधिकारियों ने पाया कि कई लोगों ने अपनी पूरी जमा-पूंजी इन ठगों को दे दी है। कुछ मामलों में तो लोगों ने अपने सोने के गहने और तांबे के बर्तन तक दान कर दिए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इन ठगों का मुख्य निशाना शिया समुदाय है। शिया मुस्लिम ईरान युद्ध को लेकर अधिक भावुक हैं, इसलिए उन्हें आसानी से बहलाया जा रहा है। वे बिना किसी हिसाब-किताब के पैसा दे रहे हैं और इन ठगों से कोई सवाल भी नहीं पूछ रहे हैं।

एजेंसियां देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। ये ठग पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वे अपना काम ऑफलाइन तरीके से कर रहे हैं ताकि उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो। वे लोगों को फर्जी रसीदें भी देते हैं।

एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस पैसे का इस्तेमाल कहां हो रहा है। अधिकारियों को अंदेशा है कि इस फंड का एक बड़ा हिस्सा देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है। दरअसल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को फिर से खड़ा करने की कोशिशें हो रही हैं। आशंका है कि यह पैसा उसी काम में लगाया जा सकता है। एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश में जुटी हैं।

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