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ईरान ने कतर में फोड़ी अमेरिका की सबसे बड़ी ‘आंख’, महायुद्ध के बीच तबाह हुआ 1.1 अरब डॉलर का सीक्रेट रडार

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे महायुद्ध में उलझे ईरान ने अब एक ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया है, जिससे पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक हड़कंप मच गया है। हिंद महासागर में अमेरिका द्वारा एक ईरानी पोत को बेरहमी से डुबाने और 80 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत के बाद ईरान बदले की आग में बुरी तरह सुलग उठा। इसी बौखलाहट और बदले की भावना में ईरान ने कतर में मौजूद अमेरिका की सबसे अहम ‘आंख’ को ही फोड़ डाला है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना लगभग अंधी हो गई है।

यह कोई मामूली हमला नहीं था, बल्कि ईरान ने सीधे तौर पर 1.1 अरब डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये) की लागत वाले उस महाशक्तिशाली अमेरिकी रडार सिस्टम को तबाह कर दिया है, जो उसकी मिसाइल रक्षा प्रणाली की रीढ़ माना जाता था। प्लैनेट लैब्स की ताजा खुफिया सैटेलाइट तस्वीरों ने इस खौफनाक तबाही की गवाही दे दी है। तस्वीरों में कतर स्थित अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के पास भीषण आग और तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है, जहां आग बुझाने का काम बदहवासी में चल रहा है।

आखिर अभेद्य माने जाने वाले इस अमेरिकी सुरक्षा चक्र में ईरान ने सेंध कैसे लगाई, यह सवाल हर किसी के मन में है। ईरान की कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस अचूक हमले की जिम्मेदारी ली है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने मिसाइलों और अपने सस्ते लेकिन बेहद खतरनाक ‘शाहेद’ ड्रोन के एक बड़े झुंड का एक साथ इस्तेमाल करके दुनिया के सबसे ताकतवर अमेरिकी एयर डिफेंस को पूरी तरह चकमा दे दिया। इस आत्मघाती ड्रोन ने करोड़ों के रडार सिस्टम के परखच्चे उड़ा दिए।

रेथियॉन कंपनी द्वारा बनाए गए इस रडार की तबाही अमेरिका के लिए किसी खौफनाक सपने से कम नहीं है। 5000 किलोमीटर तक की दूरी से किसी भी घातक बैलिस्टिक मिसाइल को सूंघ लेने वाला यह सिस्टम ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये से लेकर हिंद महासागर तक पल-पल की निगरानी करता था। पेंटागन के पूर्व सलाहकार और सैन्य अधिकारी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया पर साफ चेतावनी दी है कि इस हमले के बाद अमेरिका की मिसाइल पकड़ने वाली ‘आंखें’ हमेशा के लिए फूट चुकी हैं। भू-राजनीति विशेषज्ञों के मुताबिक, इस रडार के नष्ट होने का मतलब है कि अब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर कभी भी बड़ा और जानलेवा मिसाइल हमला हो सकता है, और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिलेगा।

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