सरोजनीनगर से गूंजा ‘जय श्रीराम’: 56वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा रवाना, भक्ति और समरसता का अनूठा संगम

लखनऊ। राजधानी के सरोजनीनगर क्षेत्र में बुधवार को आस्था और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब 56वीं ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ विधिवत रूप से रवाना हुई। सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह यात्रा अब एक व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक अभियान का रूप ले चुकी है। ग्रामसभा कुरौनी से श्रद्धालुओं का जत्था प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या के लिए प्रस्थान किया।

भक्ति के रंग में रंगा वातावरण
यात्रा के शुभारंभ के दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बन गया, जिसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल हुए।
तीन वर्षों में बना जन-आस्था का बड़ा अभियान
करीब तीन वर्षों से लगातार आयोजित हो रही यह यात्रा अब अपने 56वें चरण में पहुंच चुकी है। यह पहल सरोजनीनगर की पहचान बनती जा रही है, जो आधुनिक जीवनशैली के बीच भी पारंपरिक मूल्यों और संस्कारों को जीवित रखने का कार्य कर रही है।
हर वर्ग को जोड़ने वाला ‘श्रद्धा-सेतु’

इस यात्रा की खासियत यह है कि यह केवल तीर्थयात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को जोड़ने का माध्यम बन रही है। विशेष रूप से उन लोगों को भी इस पहल से जोड़ा जा रहा है, जो सामान्यतः धार्मिक यात्राओं से दूर रह जाते हैं। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति का उत्साह और अयोध्या पहुंचने की गहरी इच्छा साफ झलक रही थी।
सेवा और अनुशासन का उदाहरण बनी यात्रा
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, ठहरने और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। यही कारण है कि यह यात्रा सेवा, अनुशासन और सामूहिकता का प्रतीक बनती जा रही है। आयोजकों द्वारा हर पहलू का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
नई पीढ़ी के लिए बन रही प्रेरणा
रामरथ यात्रा का यह निरंतर सफर अब एक परंपरा का रूप ले चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दे रही है।
