एमजेपीआरयू ने जल जीवन मिशन का किया प्रभाव मूल्यांकन: ग्रामीण बदायूं में ‘हर घर जल’ से बदलती जिंदगी

बरेली, 19 मार्च। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) के समाज कार्य विभाग (MSW) ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना का व्यापक प्रभाव मूल्यांकन (Impact Assessment) सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह अध्ययन 18 मार्च 2026 को बदायूं जनपद में आयोजित किया गया, जिसमें योजना के क्रियान्वयन और ग्रामीण जीवन पर इसके वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन किया गया।

विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफेसर विजय बहादुर सिंह यादव के कुशल दिशा-निर्देशन में संपन्न इस अध्ययन का नेतृत्व डॉ. अफसाना सिद्दीकी एवं डॉ. रफ्फन अली ने किया। उनके मार्गदर्शन में कुल 30 छात्रों की टीम ने बदायूं जिले के आठ ब्लॉकों—वजीरगंज, उझानी, दातागंज, जगत, सलारपुर, कदरचौक, सहस्वान तथा देहगावा—के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर विस्तृत सर्वेक्षण एवं फील्ड अध्ययन किया। इस दौरान जल जीवन मिशन की जिला स्तरीय टीम ने अकादमिक दल को पूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया।
सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त आंकड़ों और ग्रामीणों से हुई सीधी बातचीत के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना ने ग्रामीण जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव लाए हैं:
स्वास्थ्य में सुधार: घर-घर नल कनेक्शन से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति होने से जलजनित रोगों (जैसे डायरिया, टाइफाइड) में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनके बच्चे बीमार कम पड़ते हैं और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च घटा है।
महिला सशक्तिकरण में वृद्धि: योजना का सबसे गहरा प्रभाव महिलाओं के जीवन पर पड़ा है। दूरस्थ स्रोतों से पानी लाने की वर्षों पुरानी मजबूरी समाप्त हो गई है। इससे बचे हुए समय का उपयोग महिलाएं अब शिक्षा, स्वरोजगार, आय सृजन और परिवार की बेहतर देखभाल में कर रही हैं। कई महिलाओं ने बताया कि अब वे समय बचने पर दैनिक मजदूरी या छोटे-मोटे व्यवसाय से जुड़कर आय अर्जित कर पा रही हैं।
सामाजिक समरसता: सार्वजनिक स्रोतों पर पानी भरने की होड़ और विवादों में भी कमी आई है, जिससे ग्रामीण सामाजिक ताने-बाने को मजबूती मिली है।

शैक्षणिक लाभ: स्कूल जाने वाली बालिकाओं पर विशेष रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि अब उन्हें सुबह पानी लाने के लिए स्कूल जाने में देर नहीं होती और वे नियमित रूप से कक्षाओं में भाग ले पा रही हैं।
कुलपति प्रो. के. पी. सिंह का संदेश
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. पी. सिंह ने समाज कार्य विभाग की टीम और सभी प्रतिभागी छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “एक विश्वविद्यालय केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक पहचान समाज से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने से बनती है। समाज कार्य विभाग द्वारा किया गया यह प्रभाव मूल्यांकन हमारी उसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे विश्वास है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष न केवल योजना की सफलता को दर्शाएंगे, बल्कि भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। यह हमारे विद्यार्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर है कि वे कक्षा से बाहर निकलकर वास्तविक धरातल पर जाकर सीखें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें।”
यह प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट जल जीवन मिशन की सफलता और ग्रामीण भारत में स्वच्छ पेयजल की पहुंच बढ़ाने के सरकारी प्रयासों का एक जीवंत दस्तावेज है। एमजेपीआरयू का समाज कार्य विभाग इस प्रकार के क्षेत्रीय अध्ययनों के माध्यम से शैक्षणिक ज्ञान और सामाजिक सरोकारों के बीच सेतु का कार्य करता रहेगा।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
