Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में गैर शिक्षण कर्मचारियों के लिए ‘कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (यूजीसी विनियम, 2015)’ विषय पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 

          बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 17 दिसंबर को आंतरिक शिकायत समिति की ओर से गैर शिक्षण कर्मचारियों के लिए ‘कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (यूजीसी विनियम, 2015)’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शुचिता चतुर्वेदी एवं आंतरिक शिकायत समिति,‌ बीबीएयू‌ की अध्यक्ष प्रो. आभा मिश्रा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के साथ हुई। सर्वप्रथम प्रो. आभा मिश्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
          मुख्य अतिथि डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने अपने वक्तव्य में आंतरिक शिकायत समिति के कार्यों, उद्देश्यों एवं महत्त्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में आईसीसी एक सशक्त एवं संवेदनशील तंत्र के रूप में कार्य करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं सहित सभी सदस्यों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आईसीसी न केवल प्राप्त होने वाली शिकायतों का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गोपनीय तरीके से निस्तारण करती है, बल्कि जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत करने का कार्य भी करती है। डॉ. शुचिता ने बताया कि आईसीसी विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर नियमों एवं यूजीसी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करती है, जिससे परिसर में अनुशासन, समानता एवं गरिमापूर्ण कार्यसंस्कृति बनी रहे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आईसीसी के माध्यम से किसी भी प्रकार के अनुचित आचरण, उत्पीड़न या अव्यवस्था को रोकने हेतु समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाती है, जिससे विश्वविद्यालय में आपसी विश्वास, नैतिक मूल्यों तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ किया जा सके।
           इस अवसर पर आयोजित विचार–विमर्श एवं संवाद सत्र में विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने अनुभवों व दृष्टिकोणों को साझा किया। सत्र के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षित, समान एवं संवेदनशील वातावरण विकसित करने, जागरूकता को सुदृढ़ करने तथा नीतियों के प्रभावी अनुपालन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि निरंतर संवाद, समय-समय पर प्रशिक्षण तथा सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही विश्वविद्यालय परिसर को और अधिक सकारात्मक, सुरक्षित एवं समावेशी बनाया जा सकता है।
          समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों एवं विभागों से संबंधित गैर शिक्षण कर्मचारी मौजूद रहें।
---------------------------------------------------------------------------------------------------