कॉफिन बॉक्स में लेटकर ध्यान कर रहे लोग, जापान में शुरू हुआ अनोखा ‘कॉफिन मेडिटेशन’ ट्रेंड

दुनिया में आमतौर पर ताबूत यानी कॉफिन का इस्तेमाल मृत शरीर को रखने और अंतिम संस्कार के लिए किया जाता है, लेकिन जापान में इन दिनों एक बेहद अनोखा ट्रेंड तेजी से चर्चा में है। यहां कुछ लोग जिंदा रहते हुए ही कॉफिन बॉक्स के अंदर लेटकर ध्यान कर रहे हैं। यह अजीब लगने वाली प्रथा अब मानसिक शांति और आत्मचिंतन के एक नए तरीके के रूप में लोकप्रिय होती जा रही है।

दरअसल, जापान के चिबा प्रांत में एक अंतिम संस्कार गृह द्वारा इस अनोखी पहल की शुरुआत की गई थी। धीरे-धीरे यह प्रयोग शांति और सुकून की तलाश कर रहे लोगों के बीच एक अलग तरह की ध्यान पद्धति के रूप में फैलने लगा। दावा किया जा रहा है कि ताबूत के अंदर कुछ समय बिताने से लोग अपनी मृत्यु के बारे में सोचते हैं और जीवन के महत्व को नए तरीके से समझ पाते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ा है यह प्रयोग
रिपोर्ट के मुताबिक जापान में युवाओं के बीच आत्महत्या की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए कुछ लोग रचनात्मक तरीके अपनाने लगे हैं। इसी कड़ी में कॉफिन मेडिटेशन को भी एक प्रतीकात्मक अनुभव माना जा रहा है।
इस पहल से जुड़े लोगों का कहना है कि ताबूत के अंदर बिताया गया समय व्यक्ति को गहराई से सोचने का मौका देता है। सीमित और शांत जगह में लेटकर लोग अपने मन को शांत कर सकते हैं और जीवन के प्रति नया नजरिया विकसित कर सकते हैं।
बाजार में मिलने लगे डिजाइनर ताबूत
अब यह चलन इतना बढ़ गया है कि बाजार में अलग-अलग डिजाइन और रंगों के ताबूत भी उपलब्ध होने लगे हैं। कुछ लोगों को साधारण लकड़ी का ताबूत पसंद आता है, जबकि कुछ लोग खास डिजाइन किए गए आकर्षक ताबूतों में ध्यान करना पसंद करते हैं।
टोक्यो में हाल ही में खुले एक स्पा में भी इस तरह के अनुभव की सुविधा दी जा रही है। यहां रंग-बिरंगे और सजावटी ताबूत तैयार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को मानसिक शांति देना और जीवन के महत्व को समझाना है।

30 मिनट के सेशन के लिए देना पड़ता है शुल्क
इस अनोखे अनुभव के लिए लोगों को लगभग 13 डॉलर यानी करीब आधे घंटे का एक सेशन मिलता है। इस दौरान ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार ताबूत को खुला या बंद रखने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अलावा वे ताबूत के अंदर संगीत सुन सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं या पूरी तरह शांत वातावरण में ध्यान भी कर सकते हैं।
इस पहल से जुड़े डिजाइनर का कहना है कि मृत्यु से जुड़े प्रतीकों को नए तरीके से समझाने का उद्देश्य यह बताना है कि मृत्यु उतनी डरावनी नहीं है जितनी लोग समझते हैं। साथ ही यह अनुभव लोगों को याद दिलाता है कि जीवन आखिर क्यों जीने लायक है।
कैसा होता है कॉफिन अनुभव
इस अनुभव से जुड़े लोगों का दावा है कि कई प्रतिभागियों ने कॉफिन मेडिटेशन के बाद मृत्यु से जुड़े डर में कमी महसूस की है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति सीमित समय के लिए इस तरह का अनुभव करता है, तो वह जीवन और मृत्यु दोनों को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण विकसित कर पाता है।
इस पहल से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग उस मृत्यु का अनुभव कर लें जिसे पलटा जा सकता है, तो शायद वे उस मृत्यु के बारे में सोचने से बच सकें जिसे वापस नहीं लाया जा सकता।
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