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राजभाषा हिंदी के व्यावहारिक इस्तेमाल पर बीबीएयू में विशेष व्याख्यान, कार्यालयी कामकाज में सरल हिंदी के प्रयोग पर जोर

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में 21 सितंबर को हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के तहत चल रही ‘सप्त दिवसीय हिंदी कार्यशाला’ में ‘राजभाषा कार्यान्वयन का व्यावहारिक पक्ष’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री अभिषेक प्रकाश मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव, डॉ. प्रीति राय और डॉ. संध्या दीक्षित भी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।

अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर मुख्य वक्ता का स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत आयोजन समिति की ओर से मुख्य वक्ता श्री अभिषेक प्रकाश को अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने ‘राजभाषा कार्यान्वयन का व्यावहारिक पक्ष’ विषय पर अपने विचार साझा किए।

दैनिक व्यवहार और कार्यालयी कामकाज में हिंदी के प्रयोग पर जोर

श्री अभिषेक प्रकाश ने कहा कि राजभाषा हिंदी का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब इसका इस्तेमाल कार्यालयी कार्यों के साथ-साथ दैनिक व्यवहार में भी सहज रूप से किया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रयोग को केवल राजभाषा से जुड़े आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय इसे नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कार्यालयी पत्राचार, टिप्पण और प्रारूपण सहित विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में सरल, सहज और प्रभावी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया। उनके अनुसार कार्यालयी कामकाज में हिंदी का व्यावहारिक इस्तेमाल इसे और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हिंदी को बढ़ावा देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी

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मुख्य वक्ता ने कहा कि राजभाषा हिंदी को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति या विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपने दैनिक कार्य-व्यवहार में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि लोगों को हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। हिंदी का निरंतर और व्यावहारिक इस्तेमाल ही राजभाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रभावी कार्यान्वयन का आधार है।

राजभाषा हिंदी उत्सव जैसे आयोजनों को बताया महत्वपूर्ण

श्री प्रकाश ने कहा कि ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ जैसे आयोजन हिंदी के प्रति जागरूकता, आत्मीयता और प्रयोग की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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