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ये प्रयागराज है! एयरक्राफ्ट गिरते ही तालाब में कूदे लाल साहब, पंकज और आलोक, जान जोखिम में डालकर पायलटों को बचाया

प्रयागराज एक बार फिर इंसानियत और साहस की मिसाल बना है। जहां एक ओर नोएडा में पानी से भरे गड्ढे में डूबते युवक को भीड़ बचा नहीं पाई, वहीं प्रयागराज में एयरफोर्स का विमान जैसे ही तालाब में गिरा, पूरा इलाका मदद के लिए उमड़ पड़ा। जलकुंभी से भरे तालाब में गिरे एयरक्राफ्ट से पायलटों को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय लोग बिना किसी डर के पानी में कूद पड़े। इस बहादुरी की अब हर ओर चर्चा हो रही है।

दरअसल, भारतीय वायुसेना का माइक्रोलाइट-116 विमान बुधवार दोपहर प्रयागराज में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नियमित उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आने के बाद विमान में सवार दोनों पायलटों ने सूझबूझ दिखाते हुए केपी इंटर कॉलेज के पास जलकुंभी से भरे तालाब में पैराशूट की मदद से क्रैश लैंडिंग कराई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों पायलटों की जान बचा ली।

तकनीकी खराबी के बाद तालाब में कराई गई क्रैश लैंडिंग
जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब 12:15 बजे यह टू-सीटर माइक्रोलाइट विमान संगम क्षेत्र का चक्कर लगाकर बमरौली एयरबेस लौट रहा था। इसी दौरान विमान में तकनीकी खराबी आ गई। पायलटों ने घनी आबादी से दूर सुरक्षित स्थान तलाशा और केपी इंटर कॉलेज के पीछे स्थित तालाब में विमान उतारने का फैसला लिया। पैराशूट खुलते ही तेज धमाके जैसी आवाज हुई, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।

इलाके में मचा हड़कंप, तालाब की ओर दौड़े लोग
विमान तालाब में उतरते ही छितपुर और मलाकराज बस्ती में हड़कंप मच गया। रॉकेट जैसी आवाज सुनते ही लोग तालाब की ओर दौड़ पड़े। जलकुंभी के बीच फंसे विमान में पायलट हाथ हिलाकर मदद मांग रहे थे। यह नजारा देखते ही स्थानीय निवासी लाल साहब निषाद, पंकज सोनकर और आलोक यादव ने बिना एक पल गंवाए तालाब में छलांग लगा दी।

10 मिनट की मशक्कत के बाद खुले विमान के दरवाजे
तालाब में दलदल और घनी जलकुंभी के कारण विमान तक पहुंचना आसान नहीं था। इसके बावजूद तीनों युवक हिम्मत नहीं हारे। विमान के पास पहुंचने पर पता चला कि जलकुंभी में फंसने से दरवाजा नहीं खुल पा रहा है। करीब 10 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद दरवाजा खुला और दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। तालाब किनारे पहुंचते ही भावुक पायलटों ने अपने रेस्क्यू करने वालों को गले लगा लिया। यह दृश्य देखकर मौजूद लोग तालियां बजाने लगे।

बीमार होने के बावजूद मदद को दौड़े लाल साहब
पायलटों की जान बचाने वाले लाल साहब निषाद मूल रूप से मेजा के पकरी सेवार गांव के निवासी हैं और फिलहाल मलाकराज में किराए पर रहते हैं। ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले लाल साहब उस दिन अस्वस्थ थे और घर में आराम कर रहे थे। इसी दौरान उनकी बेटी राधा ने छत से दौड़कर विमान क्रैश होने की सूचना दी। बिना अपनी सेहत की परवाह किए लाल साहब तुरंत तालाब की ओर दौड़ पड़े।

दलदल में धंसते पैर, फिर भी नहीं डगमगाया हौसला
मलाकराज निवासी पंकज सोनकर ने बताया कि तालाब में उतरते ही दलदल के कारण पैर धंसने लगे थे, लेकिन सामने पायलटों को फंसा देखकर सिर्फ एक ही सोच थी कि किसी तरह उनकी जान बच जाए। वहीं गोरखपुर के बड़हलगंज निवासी आलोक यादव ने बताया कि विमान का गेट न खुलने से मुश्किल बढ़ गई थी। खिड़की का शीशा तोड़ने तक का फैसला लिया गया, लेकिन इसी बीच गेट खुल गया और दोनों पायलट बाहर आ गए।

पायलटों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
वायुसेना के पायलटों ने समय रहते बड़ा फैसला लेकर घनी आबादी को संभावित हादसे से बचा लिया। तालाब के ऊपर पैराशूट खुलते ही तेज आवाज हुई, जिससे लोग घटना की ओर आकर्षित हुए। पायलटों के हाथ हिलाकर मदद मांगते देख ग्रामीणों ने बिना देर किए जान जोखिम में डाल दी। सूचना मिलने पर पुलिस और एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची और दोनों पायलटों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत सुरक्षित बताई गई है।

10 मिनट में सक्रिय हुई वायुसेना, हेलीकॉप्टर से लिया जायजा
घटना के महज 10 मिनट के भीतर वायुसेना पूरी तरह सक्रिय नजर आई। एयरफोर्स का हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा और क्रैश साइट का निरीक्षण किया। इसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ टीम भी वहां मौजूद थी। शाम करीब 6 बजे क्रैश विमान को तालाब से बाहर निकालकर किनारे तक लाया गया।

कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश
रक्षा विभाग के प्रवक्ता विंग कमांडर देवव्रत धर ने बताया कि विमान सुबह करीब 11:30 बजे रूटीन फ्लाइट पर निकला था। वापसी के दौरान तकनीकी खराबी आने पर पायलटों ने पैराशूट की मदद से तालाब में सुरक्षित लैंडिंग कराई। मामले की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं।

33 साल पहले भी हुआ था ऐसा हादसा
प्रयागराज में यह पहली घटना नहीं है। 33 साल पहले वर्ष 1993 में राजरूपपुर इलाके में भी माइक्रोलाइट विमान तकनीकी खराबी के कारण तालाब में गिरा था। उस दौरान हाईटेंशन तार से टकराने के बाद विमान में आग लग गई थी और धमाका हुआ था। उस हादसे में दोनों पायलटों की जान चली गई थी, हालांकि उन्होंने भी आबादी को बचाने के लिए अंतिम क्षण तक प्रयास किया था।

 

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