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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य एवं वित्तीय कल्याण हेतु यूनिवर्सिटी यूथ कान्क्लेव का हुआ आयोजन 

Lucknow: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 29 जनवरी को स्वास्थ्य एवं वित्तीय कल्याण हेतु यूनिवर्सिटी यूथ कान्क्लेव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उम्मीद – स्टूडेंट काउंसिलिंग सेंटर, बीबीएयू , नेशनल टॉस्क फोर्स, स्टूडेंट वेलनेस कमेटी एवं एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मुख्य वक्ता के तौर पर ऐम्स ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन यूथ एंड वेलनेस के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार, सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व डीजीएम और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के सीनियर कंसल्टेंट श्री सूर्यकांत शर्मा, उम्मीद – स्टूडेंट काउंसिलिंग सेंटर, बीबीएयू की काॅर्डिनेटर और स्टूडेंट वेलनेस कमेटी की चेयरपर्सन प्रो. नीतू सिंह, नेशनल टॉस्क फोर्स के चेयरपर्सन डॉ. दीपेश्वर सिंह मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पौंधा भेंट करके उनका स्वागत किया गया। सर्वप्रथम प्रो. नीतू सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया। इसके पश्चात डॉ. नरेंद्र सिंह ने सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया। मंच संचालन का कार्य डॉ. नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यवहार और उसकी तार्किक क्षमता उसके जीवन के कार्यों, निर्णयों और भविष्य की दिशा तय करने में अत्यंत अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब व्यक्ति सोच-समझकर, तर्क के आधार पर निर्णय लेता है, तभी वह सही और दूरगामी परिणाम देने वाले कार्य कर पाता है। वित्तीय क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने पैसे से पैसे बनाने के मूल्य और धन को सही तरह से खर्च करने पर विशेष ज़ोर दिया और कहा कि यदि व्यक्ति समय रहते इन सिद्धांतों को समझ ले तो वह न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन सकता है, बल्कि अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी कर सकता है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को ‘लर्निंग अर्निंग टूगेदर’ का मूलमंत्र भी दिया। इसके साथ ही प्रो. मित्तल ने शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने के लिए पंचकोश सिद्धांत के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय इन पाँचों कोशों का संतुलन ही व्यक्ति को संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाता है। जब शरीर स्वस्थ और संतुलित अवस्था में रहता है, तभी व्यक्ति मानसिक रूप से सुदृढ़ होकर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक मन के बिना न तो सही निर्णय संभव है और न ही सर्वांगीण विकास इसीलिए व्यक्ति का समग्र विकास तभी संभव है जब वह अपने व्यवहार, सोच, आर्थिक समझ और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य सभी पर समान रूप से ध्यान देगा।
ऐम्स ऋषिकेश के कम्युनिटी मेडिसिन यूथ एंड वेलनेस के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि युवा और यूथ दोनों की परिभाषा अलग-अलग है, क्योंकि वास्तविक अर्थों में युवा वही है जिसमें किसी भी उम्र में कुछ कर दिखाने का जज़्बा और जुनून मौजूद हो परन्तु यूथ एक निश्चित उम्र सीमा तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यदि हम सचमुच एक खुशहाल और सार्थक जीवन जीना चाहते हैं तो स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, योग आदि को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना होगा, क्योंकि एक बीमार व्यक्ति कभी भी अपनी पूर्ण क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि मनुष्य को ईश्वर ने आलोचनात्मक रूप से सोचने की विशेष क्षमता दी है, जिसका उपयोग हम सभी को अपने जीवन और समाज के हित में करना चाहिए। आज आवश्यकता है कि युवा स्वयं को जागरूक करें, अपने अस्तित्व को समझें और आध्यात्मिक, आर्थिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करें। साथ ही अपने विश्वास तंत्र को मज़बूत करते हुए कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर कुछ नया करने का साहस दिखाएँ, तभी वास्तविक रूप से युवा होने का अर्थ सार्थक होगा।
सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व डीजीएम और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के सीनियर कंसल्टेंट श्री सूर्यकांत शर्मा ने निवेशक जागरूकता कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि भारत आज भी बचत के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, किंतु वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि बचाए गए धन को किस प्रकार सही दिशा में निवेश किया जाए, ताकि भविष्य में वही निवेशित धन आय का एक सशक्त स्रोत बन सके। उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में भविष्य से जुड़ी कई वित्तीय चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं, जैसे महंगाई, रोजगार की अनिश्चितता और बढ़ती जीवन-शैली की लागत, जिनका सामना सुनियोजित और सही प्रकार के निवेश के माध्यम से काफी हद तक किया जा सकता है। सूर्यकांत जी ने विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं निवेश विकल्पों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यदि युवा वर्ग समय रहते वित्तीय अनुशासन अपनाए और दीर्घकालिक निवेश की आदत विकसित करे, तो वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि अपने सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव भी रख सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोच-समझकर, जानकारी के साथ और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाते हुए निवेश करें, जिससे आने वाले समय में आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। समस्त कार्यक्रम के दौरान डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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