UP Budget 2025: ‘यह बजट नहीं, बड़ा ढोल है’ – बुनकरों और हथकरघों की खामोशी पर अखिलेश यादव का हमला
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट को कठोर शब्दों में खारिज कर दिया। उन्होंने इसे ‘बड़ा ढोल’ करार देते हुए कहा कि इसमें शोर तो बहुत है, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह खोखला है।
‘यह बजट नहीं, एक बड़ा ढोल है’
अखिलेश यादव ने कहा, “इस बजट में जनता के लिए कुछ भी नहीं है। यह सिर्फ दिखावे का दस्तावेज है, जिसमें आवाज तो बहुत है, मगर यह अंदर से पूरी तरह खाली है। जनता को लग रहा है कि बजट आया ही नहीं, बल्कि सिर्फ प्रवचन दिया गया है।”
किसानों, बेरोजगारों और व्यापारियों को झटका
उन्होंने कहा कि बजट ने हर वर्ग को निराश किया है:
बजट देखकर किसानों की उम्मीदों का खेत सूख गया है।
महिलाओं के माथे पर घर चलाने की चिंता की लकीरें और गहरी हो गई हैं।
बेरोजगारों की आंखों के सामने अंधेरा छा गया है, व्यापारियों और दुकानदारों पर मंदी की मार और गहरा गई है।
भाजपा विधायकों और मंत्रियों पर तंज
अखिलेश यादव ने भाजपा विधायकों और मंत्रियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा,
“जो विधानसभा में मेजें पीट रहे थे, वे अब खुद ही परेशान हैं। अपने विधानसभा क्षेत्र में उन्हें जनता के गुस्से और सवालों का सामना करना पड़ेगा – महंगाई और बेरोजगारी का वे क्या जवाब देंगे?”
बुनकरों और हथकरघों की खामोशी
अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट बुनकरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए भी एक बड़ा झटका है। उन्होंने कहा, “बजट देखकर बुनकरों का ताना-बाना रुक गया है, हथकरघे खामोश हो गए हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर इस सरकार ने ‘जुमला मंत्रालय’ के लिए कितना बजट रखा है?”
‘बिना विजन का बजट’
उन्होंने भाजपा सरकार के पिछले बजटों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की कोई ठोस योजना नहीं है। *”हर साल सरकार इसे ‘सबसे बड़ा बजट’ बताती है, लेकिन यह महज शब्दों का खेल है। इस बजट का भाजपा के घोषणा पत्र से कोई तालमेल नहीं है और इसमें कोई स्पष्ट दिशा भी नहीं दिखती।”
UP का अब तक का सबसे बड़ा बजट
प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में 8,08,736 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो अब तक का सबसे बड़ा बजट बताया जा रहा है। इसका आकार पिछले वर्ष की तुलना में 9.8% अधिक है और इसमें 28,478.34 करोड़ रुपये की नई योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
हालांकि, अखिलेश यादव ने सरकार के इस दावे को भी ‘चालाकी भरा’ बताते हुए कहा कि हर नया बजट अपने पूर्ववर्ती बजट से बड़ा ही होता है, इसलिए इसे ‘सबसे बड़ा बजट’ बताने का कोई मतलब नहीं है।