Saturday, February 21, 2026
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वूमन फिजिशियंस आफ इंडिया की पहली कॉन्फ्रेंस एसआरएमएस में आरंभ

बरेली,13 अप्रैल। वूमन फिजिशियंस आफ इंडिया की पहली कांफ्रेंस एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में कल शनिवार को आरंभ हुई। इस दो दिवसीय कांफ्रेंस के पहले दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने महिलाओं की बीमारियों, उनके बेहतर इलाज और शोध कार्यों पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही वर्कशाप में अत्याधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी। कांफ्रेंस का आरंभ दोपहर बाद महिलाओं में मेटाबोलिक डिसआर्डर पर पैनल डिस्कसन से हुआ। पैनल में शामिल डा.प्रेरणा कपूर (लखनऊ), मंजू पांडेय (मथुरा), डा.मनीषा गुप्ता (मोहाली), डा.हिना सिंह (मेरठ) और डा.गुंजन मित्तल (नोएडा) ने मेटाबॉलिक डिसआर्ड़र पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि मेटाबोलिक डिसआर्डर ऐसी स्थिति है, जिसमें मोटापा, डिस्लिपिडेमिया, उच्च रक्तचाप और डाय़बिटीज शामिल होते हैं। यह डिसआर्डर पुरुषों और महिलाओं दोनों में सामान्य है। लेकिन इससे पोस्टमेनोपॉजल महिलाएं अधिक प्रभावित होती हैं। मेटाबॉलिक डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्तियों में दिल का दौरा, स्ट्रोक और कार्डियक फेल्योर होने की संभावना अधिक होती है। गर्भवती महिलाएं यदि मेटाबॉलिक डिसआर्डर से प्रभावित हों तो यह बड़े आकार के शिशु, समय से पहले प्रसव और प्रीएक्लेम्पसिया जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। इस डिसआर्डर के उपचार के लिए वजन कम करना, रक्तचाप और रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना तथा लिपिड प्रोफ़ाइल को सामान्य बनाए सबसे महत्वपूर्ण है। इसके उपचार के लिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट कम और प्रोटीन अधिक वाला संतुलित आहार शामिल करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि भी मेटाबॉलिक डिसआर्डर की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जम्मू से आई डा.अनुपमा ने बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के दिमाग में खून का थक्का जमने की दिक्कत पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को पेरीपार्टम सीवीटी कहा जाता है। यह दुर्लभ और गंभीर स्थिति होती है। एमआरआई के साथ एमआर वेनोग्राफी इसकी पुष्टि के लिए अनिवार्य है। लो मॉलिक्यूलर वेट हेपरिन से एंटीकोआगुलेशन पेरीपार्टम सीवीटी के उपचार का मुख्य आधार है। मुंबई से आई डा.अनामिका सावंत ने टेक्नोलाजी इन मेडिसिन विषय पर वर्कशाप में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी पर व्याख्यान दिया। डा.हिमाली झा ने आधुनिक तकनीकि और नई डिवाइस की जानकारी दी। मुंबई से आई डा.अश्वनी पाटिल ने चिकित्सकों के लिए उपयओगी विभिन्न मोबाइलल एप्लिकेशन की जानकारी दी। डा.स्नेहलता वर्मा ने स्वस्थ रहने में एआई की अहमियत पर व्याख्यान दिया।
बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर की डा.माधवी सरकारी ने वर्कशाप में आईसीयू में 2 D-इकोकार्डियोग्राफी के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2D-इको एक आवश्यक बेडसाइड उपकरण है, जो गंभीर रूप से बीमार मरीजों में हृदय का त्वरित मूल्यांकन करने में मदद करता है। यह विशेष रूप से हेमोडायनामिक अस्थिरता और शॉक की स्थिति में नैदानिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है। आईसीयू में 2D-इको के नियमित उपयोग से निदान की सटीकता और रोगियों के परिणामों में सुधार होता है। लखनऊ की डा.आनंदिता सेठ और एसआरएमएस आईएमएस के डा.योगेश चेट्टी ने वर्कशाप में आईसीयू में POCUS (पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड) की उपयोग पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह हृदय, फेफड़े, पेट और वाहिकीय स्थितियों के निदान में सटीकता को बढ़ाता है और सेंट्रल लाइन प्लेसमेंट, थोरासेंथेसिस और पेरासेंथेसिस जैसी प्रक्रियाओं को सुरक्षित रूप से मदद करता है। एसआरएमएस मेडिकल कालेज के डा.दीपक दास ने कंटीन्यूअस ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग (CGM) और एंबुलटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM) पर वर्कशाप में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इससे ग्लूकोज़ और रक्तचाप की निरंतर, वास्तविक समय में निगरानी आसान होती है। ये उपकरण विस्तृत प्रवृत्तियाँ और परिवर्तनशीलता दिखाते हैं, जिससे असामान्यताओं का जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है। ये व्यक्तिगत उपचार योजनाओं को अनुकूलित करने और डायबिटीज़ तथा हाइपरटेंशन के नियंत्रण में सुधार करते है। इनका उपयोग रोगियों की जागरूकता, अनुपालन और दीर्घकालिक परिणामों को बेहतर बनाता है। नवी मुंबई की श्रीमती ऋतु दास चौधरी ने महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आत्मनिर्भर और सुरक्षित भविष्य के लिए वित्तीय प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। यह महिलाओं को जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में बेहतर निर्णय लेने और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद करती है। इस मौके पर डा.निर्मल यादव (बरेली), डा.पद्माश्री गुलाटी (झांसी), डा.आभा गुप्ता (मेरठ), डा.जेबा सिद्दीकी (लखनऊ), डा.सीमा सेठ (बरेली), डा.अस्मिता देशमुख (नवी मुंबई), डा.अर्चना पाटे (नवी मुंबई), डा.एस लक्ष्मी बल (आंध्र प्रदेश), डा.अनामिका सामंत (मुंबई), डा.मीनाक्षी अवस्थी (गोरखपुर), डा.निधि मिश्रा (प्रयागराज) और डा.शक्ति कंसल (बरेली), डा.नीलिमा मेहरोत्रा और आयोजन की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी एवं एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की एचओडी डा.स्मिता गुप्ता उपस्थित रहीं। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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