बीबीएयू में ‘गरिमा के साथ वृद्धावस्था’ पर कार्यशाला, बुजुर्गों और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर

लखनऊ डेस्क: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के सामाजिक समावेशन अध्ययन केंद्र (CSSI) की ओर से 24 सितंबर को ‘गरिमा के साथ वृद्धावस्था: साथ, देखभाल और पीढ़ियों के बीच रिश्ते’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम सेकेंड इनिंग सीनियर सिटिजन्स क्लब, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम में सेकेंड इनिंग सीनियर सिटिजन्स क्लब की ओर से अतुल दुबे और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर शैलेन्द्र मोहन के साथ सामाजिक समावेशन अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. जया श्रीवास्तव मौजूद रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इसके बाद आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट किए गए। प्रो. जया श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी।
बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना जरूरी
कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें समाज के प्रति दायित्व और संवेदनशीलता विकसित करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है। जरूरत इस बात की है कि इन मूल्यों को केवल विचारों और शब्दों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि व्यवहार और दैनिक जीवन में भी उतारा जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता, सहानुभूति और सामाजिक दायित्व की भावना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रो. मित्तल ने कहा कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों से जोड़ती है। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से इस पहल को आगे बढ़ाने में CSSI को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
शहरी भारत में अकेलापन बन रहा सामाजिक चुनौती
प्रो. जया श्रीवास्तव ने कहा कि रोजगार और बेहतर करियर की तलाश में बच्चों के दूसरे शहरों और देशों में चले जाने के कारण बड़ी संख्या में बुजुर्ग माता-पिता अकेले जीवन बिता रहे हैं। ऐसे में शहरी भारत में अकेलापन बुजुर्गों के जीवन की गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक जुड़ाव केवल किसी के साथ रहने तक सीमित नहीं है। संवाद करना, किसी की बात सुनना और उसके साथ समय बिताना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताकर उनके अनुभवों और जीवन की सीख से जुड़ सकेंगे। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों को भी संवाद, अपनत्व और भावनात्मक सहयोग का अवसर मिलेगा।
बातचीत और साथ से बुजुर्गों को मिलता है अपनत्व
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सेकेंड इनिंग सीनियर सिटिजन्स क्लब के अतुल दुबे ने कहा कि क्लब से जुड़े कई वरिष्ठ नागरिकों के बच्चे रोजगार और अन्य कारणों से दूसरे शहरों या देशों में रहते हैं। ऐसे बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता या भौतिक सुविधाओं की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि किसी अपने के साथ बातचीत करने, अपनी बातें साझा करने और कुछ समय साथ बिताने की भी आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि जब युवा वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताते हैं, उनसे संवाद करते हैं और उनकी बातें सुनते हैं, तो बुजुर्गों को अपनत्व और परिवार जैसा भाव महसूस होता है। इससे उनके जीवन में सकारात्मकता और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
क्लब की सामाजिक गतिविधियों की दी जानकारी
शैलेन्द्र मोहन ने वरिष्ठ नागरिकों के हित और कल्याण के लिए क्लब की ओर से किए जा रहे विभिन्न सामाजिक कार्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्लब की गतिविधियों के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को आपसी संवाद, सहभागिता और सामाजिक जुड़ाव के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों और अन्य लोगों को क्लब की गतिविधियों से जुड़ने तथा समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम के अंत में प्रो. रुद्र साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एन. दुबे, डॉ. संगीता कृष्णा, डॉ. बेचालाल, डॉ. रामपाल, डॉ. प्रशिमिता मोहंती, प्रो. प्रशांत कुमार त्रिवेदी, डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. अजय कुमार सहित विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, विद्यार्थी और वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे।

