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पहली बार महाशिवरात्रि का व्रत रख रहे हैं? इन नियमों की अनदेखी पड़ी तो अधूरी रह सकती है पूजा

महाशिवरात्रि शिव-आराधना का सबसे बड़ा और पावन पर्व माना जाता है, जिसे हर साल देशभर में गहरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन करोड़ों शिवभक्त उपवास रखकर विधि-विधान से भगवान महादेव की पूजा करते हैं और उनसे जीवन के कष्ट दूर करने व सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत से विशेष फल की प्राप्ति होती है. लेकिन जो लोग पहली बार महाशिवरात्रि का व्रत रखने जा रहे हैं, उनके लिए व्रत के नियम जानना बेहद जरूरी माना गया है. छोटी-सी भूल भी व्रत के प्रभाव को कम कर सकती है.

महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए

शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि व्रत के दौरान कुछ भक्त पूरे दिन निराहार रहकर शिव आराधना करते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं. व्रत के दौरान सात्विक और हल्का भोजन ही ग्रहण करना चाहिए.

व्रत में फल और सूखे मेवे खाए जा सकते हैं. इसके अलावा दूध, दही और दूध से बनी चीजों का सेवन शुभ माना जाता है. सिंघाड़े के आटे से बनी पकौड़ी या हलवा, आलू, कुट्टू के आटे की पूड़ी, कुट्टू के चावल की खीर और ठंडाई भी व्रत में ली जा सकती है. वहीं मखाने की खीर और नारियल की बर्फी भी व्रत के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं.

महाशिवरात्रि के दिन क्या नहीं खाना चाहिए

महाशिवरात्रि व्रत में अन्न और नमक का सेवन वर्जित माना गया है. इस दिन दाल, तेल-मसाले और तली-भुनी चीजों से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए. व्रत के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. इसके अलावा नशा करने वाले किसी भी पदार्थ से दूर रहने की सलाह दी जाती है, ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे.

महाशिवरात्रि व्रत का पारण कब और कैसे करें

शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है. इस वर्ष महाशिवरात्रि व्रत का पारण 27 फरवरी को होगा. पारण का समय सुबह 6 बजकर 59 मिनट से सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक बताया गया है. मान्यता है कि चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत का समापन करना चाहिए.

महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने वैराग्य जीवन त्यागकर माता पार्वती के साथ विवाह किया था. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती रात्रि भ्रमण पर निकलते हैं और जागरण कर भजन-कीर्तन व पूजा करने वाले भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं.

यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति ऐसी होती है, जिससे विशेष ऊर्जा का प्रवाह होता है. यही कारण है कि इस रात की गई शिव आराधना को अत्यंत फलदायी माना जाता है.

 

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