रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अनिल कुमार राय ने दिव्यांग एवं वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास के लिए समर्पित दिशा विद्यालय का निरीक्षण किया और बच्चों की प्रतिभाओं को सराहा


बरेली,23 सितम्बर। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने कल विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए दिशा स्कूल का निरीक्षण किया। दिव्यांग एवं अति वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास के लिए समर्पित विद्यालय में कुलपति ने बच्चों के साथ आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभाओं को करीब से जाना। उन्होंने बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए भी प्रेरित किया।
विद्यालय पहुंचने पर बच्चों एवं शिक्षकों ने कुलपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रो. राय ने बच्चों से सहज एवं आत्मीय वातावरण में बातचीत की। विद्यार्थियों ने उन्हें अपनी बनाई हुई पेंटिंग, क्राफ्ट एवं अन्य रचनात्मक कार्य दिखाए। बच्चों की रचनात्मकता और प्रतिभा से प्रभावित कुलपति ने उनकी भूरि-भूरि सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।
कुलपति ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं, प्रयोगशालाओं एवं संगीत कक्ष का भी निरीक्षण किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से उनकी पढ़ाई, रुचियों, कौशल एवं भविष्य के सपनों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों से विद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
प्रो. राय ने विद्यालय की प्रबंध समिति एवं शिक्षकों के साथ बैठक कर विद्यालय की वर्तमान आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों तथा भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और दिशा स्कूल के बीच सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ कौशल, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।
“इन बच्चों को अवसर और अपनापन चाहिए”
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इस अवसर पर कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों की सेवा केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिशा स्कूल के बच्चे असाधारण प्रतिभा के धनी हैं और उनकी प्रतिभाओं को उचित मंच एवं अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “इन बच्चों को केवल अवसर और अपनापन चाहिए। रोहिलखंड विश्वविद्यालय इन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये बच्चे हमारे लिए परिवार के समान हैं और इनके सपनों को साकार करने में सहयोग देना हमारा सामाजिक धर्म है।”
कुलपति ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित करना शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की दिशा समिति के सदस्य प्रो. एस. के. पांडे, प्रो. संजय गर्ग, प्रो. यशपाल, श्री सुधाकर मौर्या एवं श्री सुधांशु शर्मा उपस्थित रहे।
दिशा स्कूल के बच्चों के साथ कुलपति का यह आत्मीय संवाद विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

