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घोसी उपचुनाव-भाजपा की गले की हड्डी बने दारा!

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। गृहमंत्री अमितशाह के दबाव में पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान की वापसी भाजपा के गले की हड्डी बन गयी है।घोसी विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा अब ऐन केन प्रकेरेन जितने पर आमादा हो गयी है।प्रशासन की दबंगई और दिल्ली नेतृत्व की थैली खुलने के बाद भी भाजपा को अपने मूल वोट लेने के लिये नाक रगड़ना पड़ रहा है।सपा ने ठाकुर सुधाकर सिंह को उतार कर तमाम समीकरण ध्वस्त कर दिया है।सुधाकर की सुधिपूर्ण सर्वस्पर्शी छवि मतलबी छवि के दारा सिंह चौहान पर भारी पड़ रही है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अभी तक न आने से भी दारा सिंह डाउन हो गये हैं। क्षेत्र के 80 से 90 प्रतिशत ठाकुर दारा सिंह का प्रचार कर रहे हैं।मुस्लिम, यादव, ठाकुर का गंठजोड़ समाजवादी पार्टी को 2012 जैसी मजबूती दे रही है।

दारा सिंह को भाजपा के नेता ही दलबदलू से ज्यादा और कुछ नहीं मान रहे हैं। गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय गांव-गांव जाकर अपने कुर्सी की दुहाई दे कर भूमिहारों को रिझा रहे हैं। यूपी सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रदेश में किसानों की आय को दुगुना करने की जिम्मेदारी संभाल रहे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से निकल कर उत्तर प्रदेश की सत्ता के भागीदार बने एके शर्मा, पूर्व मंत्री उपेन्द्र तिवारी, पूर्व राज्य मंत्री उत्तपल राय भूमिहारों को रिझाने में लगे हैं।लेकिन भूमिहार गांवों में दारा सिंह चौहान से इतनी नाराजगी है कि वह संभाले नहीं संभल रही है। कार्यकर्ताओं को अमितशाह और पूर्व प्रदेश महामंत्री संगठन का डर दिखा कर चुनाव में लगाने की हांड़तोड़ कोशिश अभी तक फेल होती दिख रही है।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ही भाजपा के लिये संकटमोचक बन कर घोसी आये हैं।अतिपिछड़ा वर्ग में उनकी पैठ और दंबग छवि दारा का सहारा है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने प्रत्याशी न उतार कर भाजपा को ऑक्सीजन देने की कोशिश की है।स्थानीय लोगों में दारा सिंह चौहान के प्रति गुस्सा बहुत है। प्रदेश महामंत्री धर्मपाल की कड़ाई के बाद भाजपा अपने सांगठनिक शक्ति को झोंक कर दारा सिंह चौहान की राजनैतिक छवि को उन्हीं के कर्मभूमि में आईसीयू से निकालने की हर संभव प्रयत्न करती दिख रही है। लेकिन आम जनता में दारा सिंह चौहान की छवि सत्ता के सौदागर से ज्यादा कुछ नहीं है। इस लिये भाजपाई दिग्गजों को नाकों चना चबाना पड़ रहा है। जो लोग मैनपुरी में भाजपा को जिताने गये थे और कमरे के बाहर सजातीय वोटों को भी नहीं जोड़ पाये थे वह यहां भी उसी की पुनरावृत्ति कर रहे हैं।प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह की मेहनत और बेदाग छवि भी भाजपा कार्यकर्ताओं को दारा सिंह के साथ जोड़ने में पसीने छुड़ा दे रही है।

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