दक्षिण का मुश्किल रण, 2024 की बिसात; कप्तान जेपी नड्डा के लिए राह नहीं होगी आसान

नई दिल्ली: साल 2020 में जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी की अध्यक्ष के तौर पर पूरी तरह जिम्मेदारी मिल गई थी। जनवरी में उनके पद संभालने के कुछ महीनों बाद ही भाजपा को बड़ी सफलता मिली और पार्टी ने मध्य प्रदेश जैसे अहम राज्य की सत्ता में वापसी कर ली थी। अब मंगलवार को उनके कार्यकाल को विस्तार मिला है। जून 2024 तक वह पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे। हालांकि, इससे पहले 2023 में 9 राज्यों के विधानसभा और 2024 में लोकसभा चुनाव की बड़ी चुनौती उनके सामने बाकी है।

दक्षिण बनेगा बड़ी चुनौती
भाजपा लंबे समय से दक्षिण भारतीय राज्यों में विस्तार के कोशिशों में लगी हुई है, लेकिन केवल कर्नाटक में ही उसे सफलता मिल सकी है। इस बार पार्टी तेलंगाना में भी खासी सक्रिय दिख रही है। अब कर्नाटक में सत्ता में बने रहना और तेलंगाना में जीत हासिल करना कठिन काम साबित हो सकता है। हालांकि, कर्नाटक में फिलहाल पार्टी का शासन है और तेलंगाना में स्थानीय चुनाव और उपचुनावों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर सियासी विस्तार में लगी हुई है। इससे पहले साल 2021 में केरल विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का ही सामना करना पड़ा था।

2024 की बिसात
इस नए विस्तार के साथ ही नड्डा के कंधों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने की है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि नड्डा ने ‘प्रधआनमंत्री नरेंद्र मोदी की करिश्माई नेतृत्व को भाजपा के लिए जनादेश में बदल दिया है।’ इस दौरान उन्हें पार्टी नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करना होगा। खबरें हैं कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के बीच खींचतान है।

अब तक कैसा रहा सफर
साल 2019 में हुआ आम चुनावों में भाजपा की जीत के बाद शाह मंत्री बने और नड्डा के पास भाजपा की जिम्मेदारी आ गई। 20 जनवरी 2020 को वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने कुछ समय बाद ही भारत को कोरोनावायरस महामारी ने घेर लिया और उस दौरान उन्होंने ‘सेवा ही संगठन’ नाम का कार्यक्रम शुरू किया। इके पहल में पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रभावित लोगों को राहत और राशन पहुंचाने का काम सौंपा गया था।

साल 2020 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जनता दल यूनाइटेड के साथ चुनाव लड़ा और 74 सीटें अपने नाम की थीं। गृहमंत्री का कहना है कि नड्डा के नेतृत्व में भाजपा का बिहार में स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा रहा है। इसके बाद पार्टी ने असम, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और गुजरात में भी बड़ी जीत दर्ज की।

यहां लगे झटके
बीते साल अगस्त में बिहार के सीएम नीतीश कुमार की जेडीयू ने नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस यानी NDA छोड़ने का फैसला कर लिया था। इससे पहले नवंबर 2019 में ही भाजपा का शिवसेना से साथ छूटा और उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली। हालांकि, बीते साल अक्टूबर में शिवसेना में फूट के बाद पार्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ फिर सत्ता में आ गई। इसके अलावा NDA का साथ छोड़ने वालों में शिरोमणि अकाली दल का नाम भी शामिल है। नड्डा की अध्यक्षता में भाजपा को सबसे बड़ा झटका हिमाचल प्रदेश की हार से लगा। बीते साल दिसंबर में हुए चुनाव के दौरान वह पार्टी में जारी मतभेदों को दूर करने में असफल रहे थे।

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