नेपाल में बाढ़ की भयावह तस्वीर, 903 मौतों के बीच शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाने की नौबत
चितवन: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा बढ़कर 903 तक पहुंच गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि दक्षिण-मध्य नेपाल के चितवन जिले में बड़ी संख्या में शव पहचान के इंतजार में पड़े हैं। शवों की संख्या बढ़ने और फोरेंसिक टीमों पर बढ़ते दबाव के बीच अधिकारियों ने कुछ शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाना शुरू कर दिया है।
250 शव पहचान के इंतजार में
बुधवार को आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद चितवन में करीब 250 शव पहचान के लिए रखे गए थे। बताया गया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से भोटेकोशी नदी शवों को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बहाकर ले गई, जिसके बाद इन्हें चितवन में बरामद किया गया। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को करीब 100 शवों को अस्थायी तौर पर दफनाया गया।

शवों की बढ़ती संख्या के कारण फोरेंसिक टीमों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया था। इसी बीच शवों को ले जाने वाले वाहनों का काफिला घने जंगल वाले इलाके में पहुंचा, जहां खुदाई मशीन की मदद से लाल मिट्टी में एक बड़ा गड्ढा खोदा गया। मौके पर अधिकारी और मीडिया कर्मी भी मौजूद रहे।
गर्मी और नमी से बढ़ी परेशानी
आपदा प्रभावित क्षेत्र में अधिक नमी और तेज गर्मी के कारण शव तेजी से खराब होने लगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शवों को लंबे समय तक खुले में रखने से संक्रमण और बीमारी फैलने की आशंका जताई। राहत और बचाव कार्य के बीच रविवार को भूस्खलन ने काठमांडू और चितवन को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग को फिर से बंद कर दिया। यह मार्ग कुछ समय पहले ही खोला गया था, लेकिन दोबारा भूस्खलन होने से आवागमन बाधित हो गया। इससे शवों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और राहत सामग्री की आवाजाही में भी मुश्किलें बढ़ गईं।
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परिवारों ने जताई नाराजगी
चितवन में रहने वाली रूबी चौधरी के दो रिश्तेदार भी लापता हैं। उन्होंने परिवार की सहमति के बिना शवों को दफनाए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और उनकी परंपरा के अनुसार नदी किनारे परिवार के करीबी सदस्यों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया जाता है।
लापता लोगों के परिजनों से बात करने की मांग
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने भी अज्ञात शवों के निपटारे के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खोज और बचाव अभियान पूरा होने से पहले तथा लापता लोगों के परिवारों से बातचीत किए बिना अज्ञात शवों का निपटान करना उचित नहीं है।

