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प्रेग्नेंसी में खानपान को लेकर न बरतें लापरवाही, जानें मां और बच्चे की सेहत के लिए क्या खाएं और किन चीजों से बचें

नई दिल्ली: गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खानपान, वजन और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। इस समय शरीर को मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए कई जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसलिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिजों का संतुलित होना जरूरी है। सही खानपान के साथ नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।

गर्भावस्था में इन पोषक तत्वों को डाइट में करें शामिल

प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम, आयरन, फोलेट, विटामिन बी12 और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व अहम भूमिका निभाते हैं। कैल्शियम के लिए दूध, दही, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, टोफू, फलियां और हरी पत्तेदार सब्जियां खाई जा सकती हैं।

आयरन और फोलेट के लिए दालें, फलियां, हरी सब्जियां और साबुत अनाज उपयोगी विकल्प हैं। विटामिन बी12 के लिए दूध और डेयरी उत्पादों के साथ जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से पूरक आहार लिया जा सकता है। ओमेगा-3 के लिए कम पारे वाली मछलियों का चयन किया जा सकता है। शाकाहारी महिलाओं को इसके दूसरे स्रोतों के बारे में चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

बाजरा, रागी, ओट्स, ब्राउन राइस और दालों को भोजन में शामिल करना भी फायदेमंद हो सकता है। घी का सेवन सीमित मात्रा में करें और अपने भोजन को संतुलित रखें।

फाइबर से भरपूर फल और सब्जियां खाएं

गर्भावस्था के दौरान सेब, नाशपाती, संतरा, अमरूद, जामुन और अन्य मौसमी फलों को आहार में शामिल किया जा सकता है। फल और सब्जियां शरीर को फाइबर, विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं। फाइबर कब्ज की समस्या से राहत पाने में भी मदद कर सकता है।

फल खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धो लें। सलाद और सब्जियों की साफ-सफाई का ध्यान रखें। ब्लड शुगर की समस्या होने पर फलों की मात्रा और भोजन की योजना डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करें। नींबू पानी भी पिया जा सकता है, लेकिन इसे पोषक भोजन का विकल्प न मानें।

प्रेग्नेंसी में इन चीजों से करें परहेज

गर्भावस्था के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

  • शराब: गर्भावस्था में शराब से पूरी तरह बचना चाहिए।

  • कच्चा या अधपका अंडा और मांस: इनमें संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु हो सकते हैं। इन्हें अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

  • कच्ची मछली: कच्ची मछली और अधपके समुद्री खाद्य पदार्थों से बचें। मछली खाते समय कम पारे वाली किस्में चुनें।

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  • ज्यादा कैफीन: चाय, कॉफी और अन्य कैफीन वाले पेय सीमित मात्रा में लें। कुल कैफीन की मात्रा डॉक्टर से समझें।

  • असुरक्षित या बिना पाश्चुरीकरण वाले डेयरी उत्पाद: संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए पाश्चुरीकृत दूध और उससे बने उत्पादों को प्राथमिकता दें।

  • अत्यधिक प्रसंस्कृत और जंक फूड: ज्यादा नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।

किसी भी दवा, हर्बल उत्पाद या कृत्रिम मिठास वाले पदार्थ का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। गर्भावस्था में सभी कृत्रिम मिठास एक जैसी नहीं होतीं, इसलिए किसी उत्पाद को सुरक्षित मानकर नियमित इस्तेमाल शुरू न करें।

एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को एक बार में ज्यादा भोजन करने से भारीपन या सीने में जलन की परेशानी हो सकती है। ऐसे में दिनभर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करना मददगार हो सकता है। पर्याप्त पानी पिएं और भोजन में प्रोटीन, साबुत अनाज, फल तथा सब्जियों को शामिल करें।

व्यायाम और नियमित जांच का भी रखें ध्यान

गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधियां, जैसे टहलना, फायदेमंद हो सकती हैं। हालांकि, व्यायाम का प्रकार और उसकी अवधि महिला की सेहत तथा गर्भावस्था की स्थिति पर निर्भर करती है। पर्याप्त आराम लें और नियमित प्रसवपूर्व जांच कराएं।

हर महिला की पोषण संबंधी जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसलिए आयरन, फोलिक एसिड या अन्य पूरक आहार अपनी मर्जी से शुरू या बंद न करें। संतुलित खानपान और चिकित्सकीय सलाह के साथ मां और बच्चे की सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।

 

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