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लीवर में खराबी का संकेत देते हैं शरीर में ये 5 बदलाव, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इन लक्षणों को नजरअंदाज?

नई दिल्ली: लीवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो पाचन से लेकर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने तक कई जरूरी काम करता है। पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में मौजूद लीवर पित्त रस बनाने के साथ शरीर के मेटाबॉलिज्म और कई अन्य प्रक्रियाओं में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके कामकाज में गड़बड़ी होने पर शरीर अलग-अलग संकेतों के जरिए चेतावनी दे सकता है।

लीवर की समस्या के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है, क्योंकि समय पर जांच और उपचार से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं शरीर में होने वाले ऐसे पांच बदलाव, जिन्हें लीवर की खराबी के संभावित संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

1. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना

पीलिया लीवर से जुड़ी समस्याओं का एक प्रमुख संकेत हो सकता है। इसमें त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का रंग पीला पड़ने लगता है। कई बार पेशाब का रंग भी गहरा पीला दिखाई दे सकता है।

ऐसा शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के कारण हो सकता है। सामान्य स्थिति में लीवर बिलीरुबिन को संसाधित करके पित्त का हिस्सा बनाने में मदद करता है, जिसके बाद यह शरीर से बाहर निकलता है। लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

2. त्वचा में लगातार खुजली और रूखापन

लीवर के सामान्य रूप से काम नहीं करने पर त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। लगातार खुजली होना या त्वचा का रूखा और परतदार होना ऐसे लक्षणों में शामिल है, जिन पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि, हर बार खुजली का कारण लीवर की बीमारी ही हो, यह जरूरी नहीं है। त्वचा में खुजली कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से भी हो सकती है। इसलिए लगातार परेशानी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

3. भूख कम लगना और वजन घटना

लीवर से बनने वाला पित्त रस भोजन के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर पाचन प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है और भूख कम लग सकती है।

भूख में लगातार कमी के साथ वजन कम होना, पेट दर्द या मतली जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं। अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के लंबे समय तक भूख कम लग रही है या वजन घट रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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4. आसानी से चोट लगना और खून बहना

अगर शरीर पर मामूली चोट से भी आसानी से निशान पड़ जाते हैं या घाव भरने में सामान्य से ज्यादा समय लगता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

लीवर ऐसे प्रोटीन बनाने में अहम भूमिका निभाता है जो शरीर में रक्त का थक्का जमाने की प्रक्रिया के लिए जरूरी होते हैं। लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर इन प्रोटीन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है और रक्तस्राव की समस्या बढ़ सकती है।

कुछ गंभीर मामलों में खून की उल्टी या मल में खून आने जैसी समस्या भी दिखाई दे सकती है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

5. एकाग्रता और याददाश्त में बदलाव

लीवर का एक महत्वपूर्ण काम शरीर से विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करने में मदद करना है। इसकी कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होने पर शरीर में विषाक्त पदार्थों का स्तर बढ़ सकता है, जिसका असर मस्तिष्क के कामकाज पर भी पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में एकाग्रता में कमी, भ्रम, याददाश्त कमजोर होना, मिजाज में बदलाव या व्यवहार और व्यक्तित्व में परिवर्तन जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। इन लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

शरीर में ऊपर बताए गए बदलाव कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर लीवर की बीमारी मान लेना सही नहीं है। अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना हुआ है, तेजी से बढ़ रहा है या उसके साथ अन्य गंभीर परेशानी भी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।

 

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