ब्रिटेन: तापमान बड़ा तो बड़ी लोगों की मुश्किलें, 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में परेशान हुए नागरिक

लंदन: मौसम ज्यादा गर्म हो जाए तो पानी को पंप करने वाले पाइप, बिजली पहुंचाने की लाइनें और रात-बेरात हमें घर पहुंचाने वाली सड़कों और रेलवे लाइनों को नुकसान पहुंचता है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रहेगी, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ता जाएगा। जलवायु परिवर्तन ब्रिटेन में गर्मी का प्रकोप तेज कर रहा है, जो एक समृद्ध देश है और गर्म तापमान के अनुकूल होने की क्षमता और संसाधन रखता है। फिर भी, पिछले दस वर्षों में इमारतों में अति ताप और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के बढ़ते जोखिम को कम करने के लिए बहुत कम किया गया है।

देश लंबे समय तक लगातार 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान को संभालने के लिए तैयार नहीं है, जो भूमध्यसागरीय देशों में अधिक आम है। यूके के बुनियादी ढांचे को आमतौर पर सर्दियों के दौरान गर्मी बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन यह गर्मियों में गर्मी को दूर रखने के लिए प्रभावी होना चाहिए। मौजूदा हालात में, ब्रिटेन के मौजूदा बुनियादी ढांचे का लगभग 20% अधिक गर्म होने का खतरा है – और यह खतरा औसत तापमान चढ़ने के साथ बढ़ने का अनुमान है।

रेल
पूरे यूके में रेलवे में हजारों मील का स्टील ट्रैक है। स्टील में उच्च तापीय चालकता होती है, जिसका अर्थ है कि यह अन्य निर्माण सामग्री की तुलना में बहुत अधिक गर्मी को तेजी से अवशोषित और स्थानांतरित कर सकता है, और आसपास के हवा के तापमान की तुलना में 20 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकता है। स्टील की पटरियां गर्मी में लंबी हो जाती हैं, ट्रैक के आधार और किनारों के खिलाफ बल लगाती हैं। जब विस्तार करने के लिए कोई जगह नहीं होती, तो यह खराब हो सकती है, जिसे मरम्मत में कुछ दिन लग सकते हैं, जिससे रेल प्रणाली बाधित हो सकती है। स्पेन और फ्रांस सहित गर्म यूरोपीय देशों में, रेल लाइनों में इस्तेमाल होने वाले स्टील को आमतौर पर निर्माण से पहले और उसके दौरान अलग तरह से तैयार किया जाता है।

उदाहरण के लिए, विभिन्न मिश्र धातुओं का उपयोग किया जाता है, या स्टील को अलग तरह से गढ़ा जाता है ताकि यह एक बार लगने के बाद अधिक प्रभावी ढंग से गर्मी के तनाव को झेल सके। ओवरहेड लाइनों और कंडक्टर रेल दोनों का उपयोग करते हुए, ब्रिटिश रेल नेटवर्क का लगभग 40% विद्युतीकृत है। बिजली की लाइनें गर्म मौसम में खराब हो सकती हैं, इसलिए बिजली की तारों में आग लगने से रोकने के लिए ट्रेनों को बहुत धीमी गति से यात्रा करने का आदेश दिया जाता है। धीमी यात्रा में बल भी कम लगता है, जिससे ट्रैक के हिलने की संभावना कम हो जाती है।

शुक्र है, आधुनिक ओवरहेड लाइनें गर्म मौसम से कम प्रभावित होती हैं क्योंकि उनमें स्प्रिंग्स या बैलेंस वेट के साथ ऑटो-टेंशन सिस्टम होते हैं जो अलग-अलग तापमान में समायोजित होते हैं। पुरानी ओवरहेड बिजली लाइनों में अभी भी ट्रेनों के लिए निश्चित तनाव कनेक्टर होते हैं और ये ज्यादा गर्मी होने पर खराब होने की अधिक संभावना रखते हैं – इन्हें बदलने की जरूरत होगी ताकि भविष्य में ज्यादा गर्मी होने पर रेल नेटवर्क सुचारू रूप से काम करते रहें।

पानी
साल के ठंडे महीनों में पानी के पाइप न फटते हैं और न ही टूटते हैं। जैसे-जैसे गर्म मौसम में घरों में अधिक पानी की खपत होती है, भूमिगत पाइपों में पानी का दबाव बढ़ जाता है। इस बीच, पानी के पाइपों को जोड़ने वाला पदार्थ सूखकर अपनी पकड़ कमजोर कर सकता है, जिससे पानी के पाइप हिलने लगते है, विशेष रूप से मोड़, जोड़ और कनेक्टर के पास से। जब इसके साथ पाइप नेटवर्क के खुले हिस्सों पर उच्च तापमान और यूवी किरणें पड़ती हैं, तो पाइप फट सकते हैं।

खराब रखरखाव वाले पानी के पाइप लंबे समय तक गर्म तापमान, उतार-चढ़ाव वाले दबाव भार और असंगत वर्षा का सामना करने पर टूट सकते हैं। पाइपलाइनों के कमजोर हिस्सों को आमतौर पर पॉलीथीन के साथ कवर और इन्सुलेट किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि ओवरहीटिंग से होने वाली क्षति सीमित हो, लेकिन जल सुविधाओं को अधिक उपयोगी और मजबूत बनाने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

बिजली
गर्म मौसम बिजली पैदा करने और वितरित करने वाले नेटवर्क के लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। यूके में पावर ट्रांसमिशन केबल्स पर अक्सर एल्यूमीनियम या रबड़ की परत चढ़ी रहती है, जो गर्मी में विस्तार के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। खंबों को आम तौर पर कांच और सिरेमिक में लगाया जाता है – बेहतर इंसुलेटर जो बिजली का संचालन करने वाली संरचनाओं को रोकते हैं। हालांकि, ट्रांसमिशन केबल्स की विशाल लंबाई को कोट करने के लिए ये बहुत महंगे हैं। बिजली उपयोगिताओं को तारों और बिजली के लचीलेपन को उच्च तापमान भिन्नताओं का सामना करने में मदद करने के लिए वैकल्पिक सामग्रियों पर शोध करने की आवश्यकता होगी।

यूके गर्म परिस्थितियों में काम करने में सक्षम कंडक्टर भी स्थापित कर सकता है और लंबे बिजली लाइन खंबों का निर्माण कर सकता है। ट्रेनों की ट्रांसमिशन केबल्स के साथ भी यही होता है। विद्युत लाइनें अत्यधिक तापमान में फैलती हैं और ढीली हो जाती हैं, प्रतिरोध में वृद्धि होती है और उनकी कार्यकुशलता में कमी आती है। दक्षता में भारी गिरावट बिजली संयंत्रों को बंद कर सकती है और लोगों को ब्लैक आउट का सामना करना पड़ सकता है। एक शुद्ध शून्य देश का निर्माण न केवल शून्य-कार्बन प्रौद्योगिकियों की तरफ संक्रमण की मांग करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे को अपनाने की भी मांग करता है। धीमी गति से और अंततः वैश्विक उष्मा को उलटने में सक्षम अर्थव्यवस्था तभी उभर सकती है जब हम आने वाले अपरिहार्य प्रभावों के लिए पहले से मौजूद चीजों को अनुकूलित करें।

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