भौम प्रदोष पर शिवलिंग का अभिषेक करते समय भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, जानें दूध और जल चढ़ाने का सही तरीका
नई दिल्ली: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाता है। इस बार 8 सितंबर 2026 को भौम प्रदोष मनाया जा रहा है। इस दिन प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, अभिषेक करते समय कुछ नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
दूध के अभिषेक के लिए तांबे का पात्र न लें

शिवलिंग का अभिषेक करते समय पात्र का विशेष महत्व बताया गया है। जल चढ़ाने के लिए आमतौर पर तांबे के पात्र का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दूध के अभिषेक में तांबे के पात्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए। दूध के लिए पीतल, चांदी या स्टील के पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। मान्यता के अनुसार, दूध तांबे के संपर्क में आने पर विष के समान हो जाता है। इसलिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल केवल जलाभिषेक के लिए करने की सलाह दी जाती है।
शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये सामग्री
शिव पूजा में अलग-अलग सामग्रियों का अपना महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर सिंदूर और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए। इसी तरह तुलसी दल, केतकी के फूल और नारियल पानी भी शिव पूजा में अर्पित नहीं किए जाते। पूजा के दौरान बेलपत्र, चंदन, भस्म और जल जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है।
शंख से जल चढ़ाने से भी करें परहेज
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शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए शंख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक कथा और मान्यता जुड़ी हुई है। इसलिए घर या शिवालय में भौम प्रदोष की पूजा करते समय सामान्य पात्र से जल की पतली धार में अभिषेक करना बेहतर माना जाता है।
जलाभिषेक करते समय रखें इन बातों का ध्यान
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय बहुत तेज धार के बजाय धीरे-धीरे जल अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के दौरान स्वच्छता के साथ मन की एकाग्रता का भी ध्यान रखना चाहिए। भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव का ध्यान करते हुए शांत मन से अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष पर पूजा करते समय सही पात्र का इस्तेमाल करने, वर्जित सामग्री से बचने और श्रद्धा के साथ अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर महादेव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

